महेश दिवाकर की रचनाओं में राष्ट्रबोध

Authors

  • संजीव कुमार
  • मुकेश

Keywords:

महेश दिवाकर, राष्ट्रबोध, खंडकाव्य, भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना, लोकचेतना, सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक मूल्य, सांस्कृतिक बहुलता, मानवीय संवेदना

Abstract

प्रस्तुत अध्ययन का विषय “महेश दिवाकर की रचनाओं में राष्ट्रबोध” है, जिसमें उनके खंडकाव्यों के माध्यम से व्यक्त राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक दृष्टि और मानवीय मूल्यों का विश्लेषण किया गया है। इस अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि महेश दिवाकर के यहाँ राष्ट्र की अवधारणा केवल राजनीतिक सत्ता, भू-सीमा या प्रशासनिक ढाँचे तक सीमित नहीं है, बल्कि वह इतिहास, संस्कृति, लोकजीवन, संघर्ष, न्याय, समानता और मानवीय गरिमा से निर्मित एक जीवंत नैतिक सत्ता के रूप में उपस्थित होती है। उनकी रचनाओं में राष्ट्रबोध का स्वर भावुक देशभक्ति तक सीमित न रहकर सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक संवेदना, लोकचेतना, स्त्री सम्मान, दलित-बहुजन अस्मिता, श्रमशील वर्गों की प्रतिष्ठा तथा बहुलतावादी भारतीयता के रूप में विकसित होता है। अध्ययन में यह भी रेखांकित किया गया है कि महेश दिवाकर अपने खंडकाव्यों में ऐसे पात्रों और प्रसंगों को केंद्र में लाते हैं जो मुख्यधारा के इतिहास और साहित्य में प्रायः हाशिए पर रहे हैं। इस प्रकार उनका काव्य राष्ट्र की नई व्याख्या प्रस्तुत करता है, जिसमें सबसे वंचित और उपेक्षित मनुष्य भी राष्ट्र की मूल शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित होता है। साथ ही, भारतीय संस्कृति और खंडकाव्य की परंपरा के संबंध को स्पष्ट करते हुए यह बताया गया है कि खंडकाव्य भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, लोकस्मृतियों, नैतिक संघर्षों और राष्ट्रीय आदर्शों की सशक्त अभिव्यक्ति का माध्यम रहा है। महेश दिवाकर की भाषा, शैली, लोकाभिमुखता और संवेदनात्मक अभिव्यक्ति उनके राष्ट्रबोध को और अधिक प्रभावशाली बनाती है। अतः यह अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि महेश दिवाकर का काव्य राष्ट्र, समाज और संस्कृति के संबंधों को अधिक व्यापक, न्यायपूर्ण और मानवीय परिप्रेक्ष्य में समझने का महत्त्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।

References

डॉ० राजेन्द्र कुमार, हिन्दी कविता में राष्ट्रबोध, पृ० 58

डॉ० पृथ्वी कुमार अग्रवाल, भारतीय संस्कृति की रूपरेखा, पृ० 2

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, भारतीय संस्कृति, पृ० 112

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, हिन्दी साहित्य का इतिहास, पृ० 233

डॉ० रामविलास शर्मा, भारत की सांस्कृतिक एकता, पृ० 101

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Published

19-03-2026

How to Cite

संजीव कुमार, & मुकेश. (2026). महेश दिवाकर की रचनाओं में राष्ट्रबोध. Kavya Setu, 2(3), 52–59. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/188

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