भारतीय उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र: एक समीक्षा अध्ययन
Keywords:
स्टार्टअप इकोसिस्टम, उद्यमिता, यूनिकॉर्न, स्टार्टअप इंडिया, फंडिंग विंटर, नवाचार, डिजिटल इंडिया, रोज़गार सृजन, फिनटेक, डीप-टेक, यूनिट इकोनॉमिक्स, टियर-2/3 शहर।Abstract
भारत आज विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बन चुका है, और यह उपलब्धि किसी एकल कारक का परिणाम नहीं, बल्कि नीतिगत इच्छाशक्ति, तकनीकी अवसंरचना, जनसांख्यिकीय लाभांश और वैश्विक पूँजी-प्रवाह के एक दुर्लभ संयोग का प्रतिफल है। पिछले एक दशक में 'स्टार्टअप इंडिया' जैसी सरकारी पहलों, सस्ती डेटा-दरों के कारण बढ़ती डिजिटल पहुँच, विशाल युवा जनसांख्यिकी और एक अत्यंत बड़े घरेलू बाज़ार के कारण देश में उद्यमिता का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है।
यह समीक्षा पत्र भारतीय स्टार्टअप परिदृश्य के विकास-क्रम, इसकी प्रमुख संभावनाओं, सामने आने वाली संरचनात्मक एवं परिचालन-संबंधी चुनौतियों, वर्तमान संदर्भ में भविष्य की संभावित दिशा का व्यापक एवं समेकित विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि 2020–2022 के 'यूनिकॉर्न उभार' के बाद पारिस्थितिकी तंत्र अब 'मूल्यांकन-केंद्रित वृद्धि' से 'लाभप्रदता-केंद्रित स्थिरता' की ओर परिपक्व हो रहा है। अक्टूबर 2024 तक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या लगभग 1.98 लाख (1,97,692) तक पहुँच गई, जिन्होंने 21 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोज़गार सृजित किए।
फिर भी फंडिंग की अनिश्चितता, लाभप्रदता का दबाव, प्रतिभा-प्रतिधारण, नियामकीय जटिलता और टियर-2/3 शहरों तक समान पहुँच जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। यह पत्र इन सभी पहलुओं को आँकड़ों, क्षेत्रीय उदाहरणों एवं नीतिगत संदर्भ के साथ समेकित करता है, और इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि भारतीय उद्यमिता का दीर्घकालिक भविष्य उज्ज्वल है, बशर्ते वृद्धि के साथ-साथ गुणवत्ता, समावेशिता और वित्तीय अनुशासन को संतुलित रूप से प्राथमिकता दी जाए।
References
चावला, पी., एवं ऋतु. (2021). भारतीय उद्यमिता के लिए अनुकूल वातावरण: साहित्य समीक्षा आधारित अध्ययन। इंटरनेशनल रिसर्च जर्नल ऑन एडवांस्ड साइंस हब, 3(4S), 245–250.
घोष, एस., एवं नंदा, आर. (2021). उभरते बाजारों में वेंचर कैपिटल निवेश और स्टार्टअप विकास। स्ट्रेटेजिक एंटरप्रेन्योरशिप जर्नल, 15(2), 185–208.
कृष्णा, एच., कश्यप, वाई., दत्त, डी., सागर, ए. डी., एवं मल्होत्रा, ए. (2022). भारत के निम्न-कार्बन ऊर्जा प्रौद्योगिकी स्टार्टअप परिदृश्य की समझ। नेचर एनर्जी, 8(1), 94–105.
कुशवाहा, एन., एवं पुंटाम्बेकर, जी. एल. (2022). भारत में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का विकास और विस्तार। इंटरनेशनल जर्नल फॉर रिसर्च इन इंजीनियरिंग एप्लीकेशन एंड मैनेजमेंट, 8(9), 61–67.
मागेश्वर, सी. आर., एवं जोतिमणि, के. (2022). भारत में उद्यमिता विकास: स्टार्टअप्स पर विशेष फोकस। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट रिसर्च, 12(1), 144–148.
नैसकॉम. (2021). भारतीय प्रौद्योगिकी स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र रिपोर्ट 2021। नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज़।
पाण्डेय, एस., लॉल, एस., पाण्डेय, एस. के., एवं अहलावत, एस. (2017). सामाजिक उद्यमिता का आकर्षण: भारत से प्राप्त साक्ष्य। सोशल एंटरप्राइज जर्नल, 13(1), 73–94.
शर्मा, के., एवं माथुर, एच. पी. (2022). स्टार्टअप्स के संदर्भ में स्थिरता की अवधारणा का पुनर्परिभाषीकरण। प्रबन्धन: इंडियन जर्नल ऑफ मैनेजमेंट, 15(7), 8–23.
श्रीकांत, एम., कुमार, जी. एन., एवं रेड्डी, डब्ल्यू. आर. (2021). उद्यमिता, नवाचार एवं आर्थिक विकास: भारतीय अनुभव। सेडमे (स्मॉल एंटरप्राइज डेवलपमेंट, मैनेजमेंट एंड एक्सटेंशन जर्नल), 47(3), 279–292.
वर्धन, जे., एवं महतो, एम. (2022). विश्वविद्यालयों में व्यवसाय इनक्यूबेशन केन्द्रों की भूमिका एवं उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र का विकास। जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप, एंटरप्रेन्योरशिप एजुकेशन एंड इनोवेशन, 8(1), 1–18.
यादव, एस. एस., सिंह, एस., एवं वर्मा, एम. (2022). नवाचारी कृषि-स्टार्टअप्स: भारत में कृषि के भविष्य को सशक्त बनाना। एएमसी इंडियन जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप, 5(2), 8–18.
यादव, वी., एवं उन्नी, जे. (2016). महिला उद्यमिता: शोध समीक्षा एवं भविष्य की दिशाएँ। जर्नल ऑफ ग्लोबल एंटरप्रेन्योरशिप रिसर्च, 6(12), 1–18.
Downloads
Published
How to Cite
Issue
Section
License
Copyright (c) 2025 Kavya Setu

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.