उत्तराखण्ड के विद्यालयों में अध्ययनरत बाल्यावस्था एवं किशोरावस्था के छात्रों के संवेगात्मक एवं सामाजिक विकास का तुलनात्मक अध्ययन
Keywords:
बाल्यावस्था, किशोरावस्था, संवेगात्मक विकास, सामाजिक विकास, आत्मविश्वास, उत्तराखण्डAbstract
प्रस्तुत शोध-पत्र “उत्तराखण्ड के विद्यालयों में अध्ययनरत बाल्यावस्था एवं किशोरावस्था के छात्रों के संवेगात्मक एवं सामाजिक विकास का तुलनात्मक अध्ययन” पर आधारित है। मानव विकास की प्रक्रिया में संवेगात्मक एवं सामाजिक आयाम अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि यही तत्व व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण, व्यवहारिक समायोजन, आत्मविश्वास तथा सामाजिक संबंधों की गुणवत्ता को निर्धारित करते हैं। बाल्यावस्था (6दृ11 वर्ष) अपेक्षाकृत स्थिर भावनात्मक अवस्था मानी जाती है, जिसमें बच्चे परिवार एवं विद्यालय के माध्यम से सामाजिक व्यवहार सीखते हैं। इसके विपरीत किशोरावस्था (12दृ18 वर्ष) में शारीरिक एवं हार्मोनल परिवर्तनों, आत्म-पहचान की खोज तथा सहपाठी दबाव के कारण भावनात्मक अस्थिरता और सामाजिक संवेदनशीलता अधिक देखने को मिलती है। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य दोनों आयु-समूहों के विद्यार्थियों के भावनात्मक परिपक्वता स्तर, सामाजिक अनुकूलन, आत्मविश्वास, व्यवहारिक समायोजन तथा सहपाठी संबंधों का तुलनात्मक विश्लेषण करना था। अध्ययन में वर्णनात्मक एवं तुलनात्मक अनुसंधान पद्धति का उपयोग किया गया। उत्तराखण्ड राज्य के चयनित विद्यालयों से स्तरीकृत यादृच्छिक नमूना विधि द्वारा 200 विद्यार्थियों (100 बाल्यावस्था एवं 100 किशोरावस्था) का चयन किया गया। आंकड़ों का विश्लेषण प्रतिशत पद्धति द्वारा किया गया। परिणामों से ज्ञात हुआ कि किशोरावस्था समूह में भावनात्मक अस्थिरता का प्रतिशत अपेक्षाकृत अधिक (लगभग 62ः) पाया गया, जबकि बाल्यावस्था समूह में भावनात्मक स्थिरता का स्तर अधिक (लगभग 68ः) रहा। सामाजिक अनुकूलन की दृष्टि से बाल्यावस्था समूह (लगभग 72ः) अधिक संतुलित पाया गया, जबकि किशोरावस्था में सहपाठी दबाव एवं सामाजिक प्रतिस्पर्धा के कारण व्यवहारिक समायोजन में चुनौतियाँ (लगभग 58ः) देखी गईं। अध्ययन से यह निष्कर्ष निकला कि दोनों अवस्थाओं की संवेगात्मक एवं सामाजिक आवश्यकताएँ भिन्न हैं। अतः विद्यालयों में आयु-विशिष्ट परामर्श सेवाएँ, जीवन-कौशल शिक्षा तथा सकारात्मक सामाजिक वातावरण प्रदान करना आवश्यक है, ताकि विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास को सुनिश्चित किया जा सके।
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