केदारनाथ अग्रवाल के काव्य में चित्रित ग्रामीण परिवेश
Abstract
भारत एक कृषि प्रधान देश कहा जाता हैं ׀ भारत की ८० प्रतिशत जनता ग्रामों में निवास करती हैं जिनका मुख्य व्यवसाय खेती तथा खेती से जुड़े पशुपालन आदि हैं׀ इसलिए भारत की समस्त संस्कृति में ग्राम्य जीवन के दर्शन होते हैं ׀ भारतीय संस्कृति तथा सभ्यता का विकास पूर्ण रूप से केवल ग्रामों में ही दिखाई देता हैं ׀ साहित्य समाज का दर्पण होता हैं, अत:साहित्य में सर्वदा ग्रामीण झलक देखने को मिलाती हैं ׀आम तौर पर देखा जाय तो अधिकांश कवि गाँव की मिट्टी से जुड़े होने के कारण उनकी रचनाओं में ग्रामीण चित्रण स्पष्ट रूप से दिखाई देता हैं ׀
प्रगतिशील विचारधारा के वरिष्ठ कवि केदरनाथ अग्रवाल ने उत्तरप्रदेश जिला बाँदा के ग्रामीण परिवेश का सूक्ष्मता से निरिक्षण -परिक्षण एवं अध्ययन करके उसे अपने काव्य में चित्रित किया हैं ׀ ग्रामीण जीवन की बुनियादी समस्याओं को अपने काव्य का विषय बनाया हैं׀ कवि ने अपनी छोटी -छोटी कविताओं में किसान जीवन की पीड़ा,त्रासदी,आर्थिक अभावग्रस्तता, ऋण की समस्या,विवशता आदि का मार्मिक शैली में वर्णन किया हैं ׀ सामाजिक कुरीतियाँ, रीतिरिवाज, एवं सामंती शोषण के विरोध में सार्थक आवाज उठायी हैं׀ इस शोषणवादी व्यवस्था में किसान एवं श्रमिक सबसे अधिक पीड़ित, शोषित हैं ׀ कवि ने ग्रामीण लोगों की पीड़ा को अपने काव्य में उतराने को अपना दायित्व माना हैं ׀
References
अग्रवाल केदारनाथ, गुलमेहंदी, साहित्य भंडार प्रकाशन, इलाहबाद,प्र.सं.१९७८, पृ.६७
अग्रवाल केदारनाथ (सं.अशोक त्रिपाठी ), बसंत में प्रसन्न हुई पृथ्वी, साहित्य भंडार प्रकाशन, इलाहबाद ,प्र.सं.१९९३, पृ.९४
अग्रवाल केदारनाथ, खुली आँखे खुले डैने, साहित्य भंडार प्रकाशन, इलाहबाद ,प्र.सं.१९९३, पृ.६३
अग्रवाल केदारनाथ, गुलमेहंदी, साहित्य भंडार प्रकाशन, इलाहबाद,प्र.सं.१९७८, पृ.५४
अग्रवाल केदारनाथ (सं.अशोक त्रिपाठी ), कहें केदार खरी -खरी, साहित्य भंडार प्रकाशन, इलाहबाद ,प्र.सं.१९८३, पृ.३०
अग्रवाल केदारनाथ, बोल-बोल अबोल, परिमल प्रकाशन, इलाहबाद,प्र.सं.१९८५, पृ.७१
अग्रवाल केदारनाथ (सं.अशोक त्रिपाठी ), कुह की कोयल खड़े पेड़ की देह, साहित्य भंडार प्रकाशन, इलाहबाद ,प्र.सं.१९९७, पृ.२४४
पूर्ववत, पृ.१७६
अग्रवाल केदारनाथ (सं.अशोक त्रिपाठी ), बसंत में प्रसन्न हुई पृथ्वी, साहित्य भंडार प्रकाशन, इलाहबाद ,प्र.सं.१९९३, पृ.६६
अग्रवाल केदारनाथ (सं.अशोक त्रिपाठी ), कहें केदार खरी -खरी, साहित्य भंडार प्रकाशन, इलाहबाद ,प्र.सं.१९८३, पृ.८१
अग्रवाल केदारनाथ (सं.अशोक त्रिपाठी ), बसंत में प्रसन्न हुई पृथ्वी, साहित्य भंडार प्रकाशन, इलाहबाद ,प्र.सं.१९९३,पृ.८२
अग्रवाल केदारनाथ, आग का आईना, साहित्य भंडार प्रकाशन, इलाहबाद,प्र.सं.१९७८, पृ.४५
पूर्ववत, पृ.६७
Downloads
How to Cite
Issue
Section
License
Copyright (c) 2026 Kavya Setu

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.