महात्मा गांधी के शिक्षा दर्शन की वर्तमान शिक्षा प्रणाली में प्रासंगिकता
Keywords:
महात्मा गांधी, शिक्षा दर्शन, नाई तालीम, मूल्यपरक शिक्षा, वर्तमान शिक्षा प्रणालीAbstract
महात्मा गांधी का शिक्षा दर्शन शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन की प्रक्रिया न मानकर व्यक्ति के सर्वांगीण विकास का माध्यम मानता है। गांधीजी के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य नैतिकता, आत्मनिर्भरता, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा श्रम की गरिमा का विकास करना है। वर्तमान शिक्षा प्रणाली मुख्यतः अंक, परीक्षा, प्रतिस्पर्धा और रोजगारोन्मुखी कौशलों पर केंद्रित है, जिसके कारण मूल्यपरक और मानवतावादी शिक्षा अपेक्षाकृत हाशिये पर चली गई है। इस शोध पत्र में गांधीजी के शिक्षा दर्शन और समकालीन शिक्षा व्यवस्था के बीच संबंधों का विश्लेषण किया गया है तथा यह स्पष्ट किया गया है कि ‘नाई तालीम’, कार्य-आधारित शिक्षा और मूल्य-आधारित शिक्षण पद्धतियाँ आज की शिक्षा संबंधी चुनौतियों—जैसे नैतिक संकट, सामाजिक असमानता और बेरोज़गारी—के समाधान में सहायक हो सकती हैं। अध्ययन यह निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि गांधीवादी शिक्षा दर्शन आधुनिक शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी, नैतिक और जीवनोपयोगी बनाने में आज भी अत्यंत प्रासंगिक है।
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