गाँव से विश्व तक एकात्म मानव दर्शन के आधार पर पंचायत की भूमिका

Authors

  • रचना देवी, प्रो. (डॉ.) मीनाक्षी शर्मा

Keywords:

एकात्म मानव दर्शन, पंचायत, ग्राम स्वशासन, गाँव से विश्व, स्थानीय से वैश्विक विकास, सतत विकास

Abstract

भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में पंचायतें स्थानीय स्वशासन की आधारशिला हैं, जो गाँव से लेकर राष्ट्र और विश्व तक विकास की प्रक्रिया को दिशा प्रदान करती हैं। इस संदर्भ में पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित एकात्म मानव दर्शन पंचायतों की भूमिका को एक समग्र, मूल्य-आधारित और मानव-केंद्रित दृष्टि प्रदान करता है। एकात्म मानव दर्शन व्यक्ति, समाज, राष्ट्र और प्रकृति के पारस्परिक समन्वय पर आधारित है, जिसमें विकास को केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित न मानकर सामाजिक, सांस्कृतिक, नैतिक और पर्यावरणीय आयामों से जोड़ा गया है। पंचायतें इस दर्शन को व्यवहार में उतारने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं, क्योंकि वे स्थानीय आवश्यकताओं, सहभागिता और सामुदायिक उत्तरदायित्व पर आधारित शासन को सशक्त बनाती हैं।

यह शोध-पत्र ‘गाँव से विश्व तक’ की अवधारणा के अंतर्गत एकात्म मानव दर्शन के आलोक में पंचायतों की भूमिका का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। शोध-पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि पंचायतें ग्राम विकास, सामाजिक समरसता, महिला एवं वंचित वर्गों के सशक्तिकरण, तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। साथ ही, वैश्विक संदर्भ में पंचायतें सतत विकास लक्ष्यों (SDGs), पर्यावरण संरक्षण और सहभागी लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर साकार करने की क्षमता रखती हैं।

शोध-पत्र यह प्रतिपादित करता है कि जब पंचायतें एकात्म मानव दर्शन से प्रेरित होकर कार्य करती हैं, तब स्थानीय विकास वैश्विक मानव-कल्याण से जुड़ जाता है। निष्कर्षतः, पंचायतों का सशक्तिकरण केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि ‘लोकल टू ग्लोबल’ दृष्टि के माध्यम से संतुलित, समावेशी और सतत विकास का आधार है। इस प्रकार, एकात्म मानव दर्शन के आधार पर पंचायतें गाँव से विश्व तक मानव-केंद्रित विकास की सेतु बन सकती हैं।

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Published

18-06-2025

How to Cite

रचना देवी, प्रो. (डॉ.) मीनाक्षी शर्मा. (2025). गाँव से विश्व तक एकात्म मानव दर्शन के आधार पर पंचायत की भूमिका. Kavya Setu, 1(6), 125–140. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/129

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