नागरिकों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और उत्तरदायित्व

Authors

  • पूजा वर्मा

Keywords:

पर्यावरण, विधान और नीति

Abstract

पर्यावरण प्रदूषण की समस्या स्वाभाविक रूप से उत्पन्न नहीं हुई है, बल्कि यह मानवीय गतिविधियों की देन है। 1970 के दशक की शुरुआत से ही वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ने लगी थी। इसी अवधि में पर्यावरण नीति का दृष्टिकोण पारंपरिक “एंड-ऑफ-पाइप” समाधानों से हटकर रोकथाम और नियंत्रण आधारित रणनीतियों की ओर अग्रसर हुआ। जनसंख्या वृद्धि और तीव्र प्रौद्योगिकीय विकास ने पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है, जिसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पर्यावरणीय चिंताओं को गंभीरता से उठाया गया। भारत में भी पर्यावरण संरक्षण हेतु समय-समय पर विभिन्न विधिक और नीतिगत उपायों को अपनाया गया है। प्रारंभिक चरणों में पर्यावरणीय कानूनों का निर्माण तब हुआ जब प्रदूषण की समस्या देश में व्यापक रूप से नहीं फैली थी। जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय सरोकार गहरे होते गए, भारत ने भी अपने संविधान में संशोधन कर पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्धता दिखाई। विशेष रूप से 1980 के दशक में यह विचार जोर पकड़ने लगा कि विकास की परिभाषा में न केवल आर्थिक प्रगति, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए पर्यावरण की गुणवत्ता की रक्षा भी शामिल होनी चाहिए।

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Published

27-03-2025

How to Cite

पूजा वर्मा. (2025). नागरिकों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और उत्तरदायित्व. Kavya Setu, 1(3), 18–21. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/22

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