लक्षण गीतों की शैक्षणिक एवं व्यावहारिक उपयोगिता : एक अध्ययन

Authors

  • भावना शर्मा, डॉ. स्मिता सहस्त्रबुद्धे

DOI:

https://doi.org/10.65578/kavyasetu.v2.i4.314

Keywords:

लक्षण गीत, संगीत शिक्षण, राग-तत्त्व, वादी-संवादी, पकड़, चलन, ताल, स्वर लिपि, शैक्षणिक उपयोगिता, व्यावहारिक उपयोगिता

Abstract

भारतीय शास्त्रीय संगीत में रागों की संरचना, स्वरूप एवं प्रस्तुति को समझाने के लिए विभिन्न शास्त्रीय एवं व्यावहारिक पद्धतियों का विकास हुआ है। इन पद्धतियों में लक्षण गीत एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माध्यम के रूप में स्थापित हुए हैं। लक्षण गीत ऐसे गीतात्मक रूप हैं जिनमें किसी राग के प्रमुख तत्त्व—जैसे स्वर-संरचना, वादी-संवादी, पकड़, चलन एवं भाव—का संक्षिप्त एवं स्पष्ट वर्णन किया जाता है।

प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य लक्षण गीतों की शैक्षणिक एवं व्यावहारिक उपयोगिता का अध्ययन करना है। इस अध्ययन में यह विश्लेषण किया गया है कि लक्षण गीत संगीत शिक्षण में किस प्रकार एक प्रभावी उपकरण के रूप में कार्य करते हैं तथा किस प्रकार वे विद्यार्थियों के राग ज्ञान को सरल, स्पष्ट एवं स्थायी बनाते हैं। इस शोध में गुणात्मक एवं मात्रात्मक दोनों प्रकार की पद्धतियों का उपयोग किया गया है। प्राथमिक स्रोत के रूप में विद्यार्थियों एवं संगीत शिक्षकों से प्राप्त जानकारी का विश्लेषण किया गया, जबकि द्वितीयक स्रोत के रूप में विभिन्न संगीत ग्रंथों का अध्ययन किया गया। आवृत्ति वितरण एवं Chi-square परीक्षण के माध्यम से परिकल्पनाओं का परीक्षण किया गया।

शोध के निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि लक्षण गीत संगीत शिक्षण में एक अत्यन्त प्रभावी एवं व्यावहारिक उपकरण हैं। ये न केवल राग के शास्त्रीय तत्त्वों को स्पष्ट करते हैं, बल्कि विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति एवं राग पहचानने की क्षमता को भी बढ़ाते हैं। अतः यह कहा जा सकता है कि लक्षण गीत भारतीय शास्त्रीय संगीत शिक्षा में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इनके माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी एवं वैज्ञानिक बनाया जा सकता है।

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How to Cite

भावना शर्मा, डॉ. स्मिता सहस्त्रबुद्धे. (2026). लक्षण गीतों की शैक्षणिक एवं व्यावहारिक उपयोगिता : एक अध्ययन. Kavya Setu, 2(4), 229–240. https://doi.org/10.65578/kavyasetu.v2.i4.314

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