भारत में नक्सलवाद के बदलते स्वरूप का अध्ययन - आदिवासी क्षेत्र, विकास और आंतरिक सुरक्षा के विशेष संदर्भ में

Authors

  • प्रा. राहुल दिलीप पाटील

Keywords:

नक्सलवाद, माओवाद, आदिवासी समुदाय, आंतरिक सुरक्षा, समावेशी विकास, वन अधिकार, विस्थापन, स्थानीय स्वशासन, पुनर्वास, सामाजिक न्याय।

Abstract

भारत में नक्सलवाद एक जटिल सामाजिक, राजनीतिक एवं आंतरिक सुरक्षा संबंधी समस्या के रूप में विकसित हुआ है। वर्ष 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से प्रारंभ हुए इस आंदोलन का विस्तार समय के साथ मध्य एवं पूर्वी भारत के आदिवासी तथा वन क्षेत्रों तक हुआ। भूमि-संबंधी असमानता, प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार, विस्थापन, प्रशासनिक उपेक्षा और सामाजिक-आर्थिक वंचना ने इसके विस्तार की परिस्थितियों को प्रभावित किया। दूसरी ओर, माओवादी संगठनों द्वारा अपनाई गई हिंसात्मक गतिविधियों ने स्थानीय नागरिकों, सुरक्षा बलों और विकासात्मक प्रक्रियाओं के सामने गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न कीं।

प्रस्तुत शोध-आलेख में नक्सलवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, बदलते संगठनात्मक स्वरूप, आदिवासी क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों, विकासात्मक नीतियों तथा भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन के लिए ऐतिहासिक, वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध-पद्धतियों का प्रयोग किया गया है। इसमें सरकारी प्रतिवेदनों, विधिक दस्तावेजों और प्रामाणिक अकादमिक अध्ययनों को आधार बनाया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि वर्ष 2010 के बाद नक्सलवादी हिंसा के भौगोलिक विस्तार और घटनाओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। जुलाई 2026 में केंद्र सरकार ने किसी भी जिले को नक्सल प्रभावित श्रेणी में न रखे जाने की जानकारी दी। तथापि, उसी वर्ष हिंसात्मक घटनाओं का दर्ज होना इस बात को रेखांकित करता है कि प्रशासनिक वर्गीकरण में परिवर्तन और हिंसा की पूर्ण समाप्ति अलग-अलग स्थितियाँ हैं।

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How to Cite

प्रा. राहुल दिलीप पाटील. (2025). भारत में नक्सलवाद के बदलते स्वरूप का अध्ययन - आदिवासी क्षेत्र, विकास और आंतरिक सुरक्षा के विशेष संदर्भ में. Kavya Setu, 1(6), 211–216. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/382

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