वैदिक अनुष्ठानों में छंद-विधान और सामाजिक समरसता : एक सांस्कृतिक-समाजशास्त्रीय विश्लेषण
Keywords:
वैदिक अनुष्ठान, छंद-विधान, यज्ञ, सामूहिक चेतना, सामाजिक समरसता, वैदिक संस्कृतिAbstract
वैदिक सभ्यता में अनुष्ठान केवल धार्मिक कर्मकाण्ड नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक संगठन, सांस्कृतिक एकता और सामूहिक चेतना के सशक्त माध्यम थे। इन अनुष्ठानों की आत्मा वैदिक मंत्रों में निहित है, और मंत्रों की प्रभावशीलता का मूल आधार उनका छंदबद्ध स्वरूप है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य वैदिक अनुष्ठानों—विशेषतः यज्ञ, हवन और जप—में प्रयुक्त छंद-विधान का सांस्कृतिक एवं समाजशास्त्रीय विश्लेषण करना है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि छंद न केवल अनुष्ठानों को संरचित एवं स्मरणीय बनाते हैं, बल्कि समाज में समरसता, सहयोग, नैतिक अनुशासन और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं। आधुनिक समाज में भी सामूहिक जप, गायत्री यज्ञ और वैदिक अनुष्ठानों के पुनरुत्थान के माध्यम से सामाजिक तनाव में कमी और सांस्कृतिक पहचान के सुदृढ़ीकरण की संभावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
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