मानसिक स्वास्थ्य, तनाव-प्रबंधन और भावनात्मक संतुलन में गीता के ध्यान-योग एवं हठयोग के प्राणायाम का प्रभाव
Keywords:
गीता, ध्यान-योग, हठयोग, प्राणायाम, मानसिक स्वास्थ्य, तनाव-प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन, योग-चिकित्सा, चित्तशुद्धि, समत्व-योगAbstract
आधुनिक युग में मानसिक स्वास्थ्य, तनाव और भावनात्मक असंतुलन मनुष्य के लिए प्रमुख चुनौतियाँ बन चुकी हैं। व्यस्त जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या, डिजिटल निर्भरता, प्रतिस्पर्धा और भौतिकवादी संस्कृति के कारण मनुष्य निरंतर मानसिक दबाव में जी रहा है। ऐसे समय में भारतीय ज्ञान परंपरा—विशेषत: श्रीमद्भगवद्गीता का ध्यान-योग तथा हठयोग का प्राणायाम—मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और तनाव-निवारण के अत्यंत प्रभावी उपाय के रूप में पुनः प्रतिष्ठित हो रहे हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र गीता के ध्यान-योग और हठयोग के प्राणायाम के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन करता है। अध्ययन से ज्ञात होता है कि ध्यान-योग मन की चंचलता को शांत कर आंतरिक प्रसाद की अनुभूति कराता है, जबकि प्राणायाम जीवनी-शक्ति (प्राण) को संतुलित कर मनोवैज्ञानिक तनाव को कम करता है। दोनों मिलकर मनुष्य की भावनात्मक संरचना, व्यवहार और मानसिक स्थिरता पर गहरा प्रभाव डालते हैं। इस शोध से यह स्पष्ट हुआ कि भारतीय योग-परंपरा आधुनिक तनाव-प्रबंधन की प्रभावी वैज्ञानिक प्रणाली है, जो व्यक्ति में सकारात्मकता, आत्मविश्वास और मानसिक शांति को विकसित करती है।
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