सर्वेश्वर की काव्य-चेतना और “कुआनो नदी” में युगीन यथार्थ: स्वाधीन भारत के मोहभंग और राजनीतिक अस्थिरता का प्रभाव।

Authors

  • डॉ आरती वर्मा मुक्ति

Keywords:

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, काव्य-चेतना, कुआनो नदी, युगीन यथार्थ, राजनीतिक मोहभंग

Abstract

स्वाधीनता प्राप्ति के पश्चात भारत ने जिस आदर्शवादी स्वप्नलोक की कल्पना की थी, वह शीघ्र ही यथार्थ की कठोर भूमि से टकराकर खंडित हो गया। इस मोहभंग की स्थिति ने साहित्य को गहराई से प्रभावित किया। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की काव्य-चेतना का विश्लेषण करना है, विशेष रूप से उनकी प्रसिद्ध कविता “कुआनो नदी” के संदर्भ में, जिसमें स्वाधीन भारत की राजनीतिक अस्थिरता, सामाजिक विघटन और जनमानस की निराशा का सशक्त चित्रण मिलता है।इस अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि सर्वेश्वर की काव्य-दृष्टि  भावात्मक अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं है,  वह एक तीक्ष्ण सामाजिक-राजनीतिक आलोचना भी प्रस्तुत करती है। “कुआनो नदी” एक प्रतीकात्मक संरचना के रूप में उभरती है, जिसमें नदी  प्राकृतिक तत्व न होकर समय, व्यवस्था और विघटन का बिंब बन जाती है।

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Published

02-04-2026

How to Cite

डॉ आरती वर्मा मुक्ति. (2026). सर्वेश्वर की काव्य-चेतना और “कुआनो नदी” में युगीन यथार्थ: स्वाधीन भारत के मोहभंग और राजनीतिक अस्थिरता का प्रभाव।. Kavya Setu, 2(4), 19–27. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/198

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