सर्वेश्वर की काव्य-चेतना और “कुआनो नदी” में युगीन यथार्थ: स्वाधीन भारत के मोहभंग और राजनीतिक अस्थिरता का प्रभाव।
Keywords:
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, काव्य-चेतना, कुआनो नदी, युगीन यथार्थ, राजनीतिक मोहभंगAbstract
स्वाधीनता प्राप्ति के पश्चात भारत ने जिस आदर्शवादी स्वप्नलोक की कल्पना की थी, वह शीघ्र ही यथार्थ की कठोर भूमि से टकराकर खंडित हो गया। इस मोहभंग की स्थिति ने साहित्य को गहराई से प्रभावित किया। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की काव्य-चेतना का विश्लेषण करना है, विशेष रूप से उनकी प्रसिद्ध कविता “कुआनो नदी” के संदर्भ में, जिसमें स्वाधीन भारत की राजनीतिक अस्थिरता, सामाजिक विघटन और जनमानस की निराशा का सशक्त चित्रण मिलता है।इस अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि सर्वेश्वर की काव्य-दृष्टि भावात्मक अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं है, वह एक तीक्ष्ण सामाजिक-राजनीतिक आलोचना भी प्रस्तुत करती है। “कुआनो नदी” एक प्रतीकात्मक संरचना के रूप में उभरती है, जिसमें नदी प्राकृतिक तत्व न होकर समय, व्यवस्था और विघटन का बिंब बन जाती है।
References
सिंह, नामवर (1980). कविता के नए प्रतिमान. नई दिल्ली: राजकमल प्रकाशन।
शर्मा, रामविलास (1985). भारतीय साहित्य और समाज. दिल्ली: वाणी प्रकाशन।
सिंह, दूधनाथ (1992). समकालीन कविता और समाज. इलाहाबाद: लोकभारती।
सक्सेना, सर्वेश्वर दयाल (1975). कुआनो नदी. नई दिल्ली: राजकमल प्रकाशन।
चतुर्वेदी, रामस्वरूप (2001). हिंदी कविता का इतिहास. दिल्ली: विश्वविद्यालय प्रकाशन।
त्रिपाठी, विश्वनाथ (2005). आधुनिक हिंदी कविता. दिल्ली: वाणी प्रकाशन।
सक्सेना, सर्वेश्वर दयाल. (1975). कुआनो नदी. नई दिल्ली: राजकमल प्रकाशन।
सिंह, नामवर. (1980). कविता के नए प्रतिमान. नई दिल्ली: राजकमल प्रकाशन।
शर्मा, रामविलास. (1985). भारतीय साहित्य और समाज. नई दिल्ली: वाणी प्रकाशन।
सिंह, दूधनाथ. (1992). समकालीन कविता और समाज. इलाहाबाद: लोकभारती प्रकाशन।
त्रिपाठी, विश्वनाथ. (2005). आधुनिक हिंदी कविता. नई दिल्ली: वाणी प्रकाशन।
चतुर्वेदी, रामस्वरूप. (2001). हिंदी साहित्य का इतिहास. नई दिल्ली: विश्वविद्यालय प्रकाशन।
वर्मा, रामकुमार. (1998). हिंदी साहित्य का आलोचनात्मक अध्ययन. प्रयागराज: लोकभारती।
मिश्र, विजयदेव. (2010). आधुनिक हिंदी काव्य विमर्श. नई दिल्ली: वाणी प्रकाशन।
पांडेय, मैनेजर. (2012). साहित्य और समाज. नई दिल्ली: राजकमल प्रकाशन।
गुप्ता, श्यामसुंदर. (2015). हिंदी कविता का समाजशास्त्र. नई दिल्ली: वाणी प्रकाशन।
कुमार, अशोक. (2018). आधुनिकता और हिंदी साहित्य. नई दिल्ली: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस।
जैन, रमेशचंद्र. (2016). हिंदी कविता में प्रतीकवाद. नई दिल्ली: सेज प्रकाशन।
तिवारी, हजारीप्रसाद. (2003). हिंदी साहित्य की भूमिका. नई दिल्ली: राजकमल प्रकाशन।
द्विवेदी, हजारीप्रसाद. (2004). आधुनिक हिंदी साहित्य की प्रवृत्तियाँ. नई दिल्ली: वाणी प्रकाशन।
भारद्वाज, रमेश. (2013). हिंदी काव्य की प्रवृत्तियाँ. नई दिल्ली: वाणी प्रकाशन।
सिन्हा, केदारनाथ. (2022). समकालीन हिंदी आलोचना. नई दिल्ली: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस।
लाल, ओमप्रकाश. (2011). आलोचना और साहित्य. नई दिल्ली: राजकमल प्रकाशन।
अग्रवाल, नामदेव. (2014). हिंदी कविता का विकास. नई दिल्ली: मैकमिलन प्रकाशन।
जोशी, प्रभाकर. (2017). साहित्य और राजनीति. नई दिल्ली: पेंगुइन प्रकाशन।
रॉय, अरुण. (2019). भारतीय साहित्य और आधुनिकता. नई दिल्ली: कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस।
Downloads
Published
How to Cite
Issue
Section
License
Copyright (c) 2026 Kavya Setu

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.