अनुवाद की सामान्य विशिष्टताएं: एक अध्ययन

Authors

  • डाॅ. सुधा सिंह

Keywords:

अनुवाद, स्रोत भाषा, लक्ष्य भाषा, भावानुवाद, भाषिक संरचना

Abstract

प्रस्तुत अध्ययन अनुवाद की सामान्य विशेषताओं, स्वरूप तथा उसके व्यावहारिक पक्षों का विश्लेषण करता है। अनुवाद को एक ऐसी प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया गया है जिसमें एक भाषा के विचारों, भावों और आशयों को दूसरी भाषा में सार्थक एवं प्रभावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया जाता है। यह केवल भाषाई रूपांतरण नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और वैचारिक समन्वय की प्रक्रिया भी है, जो विभिन्न भाषाओं और समाजों के बीच सेतु का कार्य करती है। अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि अनुवाद एक जटिल, बहुपक्षीय और सर्जनात्मक क्रिया है, जिसमें अनुवादक, स्रोत भाषा तथा लक्ष्य भाषा तीनों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। सफल अनुवाद के लिए आवश्यक है कि अनुवादक दोनों भाषाओं पर अधिकार रखते हुए मूल आशय को सुरक्षित रखे और लक्ष्य भाषा की प्रकृति, शैली तथा प्रवाह के अनुरूप उसे प्रस्तुत करे। विशेष रूप से अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद के संदर्भ में यह बताया गया है कि शब्दशः अनुवाद के स्थान पर भावानुवाद को प्राथमिकता देनी चाहिए। इस प्रकार, अनुवाद एक कला और विज्ञान दोनों है, जो संप्रेषण को प्रभावी और सार्थक बनाता है।

References

अनुवाद विज्ञान, सिद्धान्त और प्रविधि- डाॅ. भोलानाथ तिवारी, किताबघर प्रकाशन, दिल्ली, 2011, पृ.सं. 9

वही, पृ.सं. 22

वही, पृ.सं. 68

अनुवाद कला सिद्धान्त और प्रयोग- डाॅ. कैलाश चंद भाटिया, तक्षशिला प्रकाशन, नई दिल्ली, 2023, पृ.सं. 72

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Published

20-04-2025

How to Cite

डाॅ. सुधा सिंह. (2025). अनुवाद की सामान्य विशिष्टताएं: एक अध्ययन. Kavya Setu, 1(4), 99–105. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/223

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