प्लेटो का न्याय का सिद्धांत व आधुनिक न्याय व्यवस्था
Keywords:
न्याय व्यवस्था, मनोवैज्ञानिक, उपार्जित योग्यता, प्लेटो न्याय, योग्यता, थ्रेसीमेकसAbstract
प्लेटो, जिसे राजनीतिक दर्षन का पिता कहा जाता है, ने राजनीतिक दर्षन और उसके संदर्भ में विभिन्न षिक्षा षास्त्रों पर विस्तृत रूप से अपने विचार रखे और विष्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत किए। उसके द्वारा दिए गए विभिन्न विष्लेषणात्मक विचारों में ही एक विचार उनके द्वारा उनकी पुस्तक ‘रिपब्लिक’ में दिया गया ‘न्याय का सिद्धांत’ है। उन्होंने न्याय के सिद्धांत पर इतना बल दिया कि उनकी पुस्तक ‘रिपब्लिक’ का नाम ‘न्याय से सम्बन्धित’ ;ब्वदमतदपदह श्रनेजपबमद्ध रखा गया।1 प्लेटो न्याय की व्यवस्था को अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानते हुए उसके द्वारा राज्य को सक्षम, व्यवस्थित, स्थिर और अनुषासित बनाना चाहते थे। वो अपने आदर्ष राज्य के सिद्धांत के माध्यम से भी आदर्ष न्याय व्यवस्था ही और आदर्ष न्याय व्यवस्था के माध्यम से आदर्ष राज्य की स्थापना करना चाहते थे। वो अपने न्याय के सिद्धांत में योग्यता आधारित कार्यों के विषिष्टीकरण की व्याख्या करके समाज में दक्षता पर बल दे रहे थे। प्लेटो एक ऐसे मनोवैज्ञानिक सिद्धांत का अन्वेषण करना चाहता था जो एक आदर्ष समाज की रचना कर सके, एक ऐसे आदर्ष राज्य का निर्माण कर सके जिसमें प्रत्येक व्यक्ति समूह को अपनी प्राकृतिक क्षमता तथा उपार्जित योग्यता के आधार पर अधिक से अधिक विकास करने का समुचित अवसर प्राप्त हो सके, साथ ही वह अपने अन्य साथियों को समुचित विकास में किसी प्रकार की बाधा उपस्थित न करे।
References
डाॅ. वी.एल. फडिया और डाॅ. कुलदीप फडिया, प्रमुख पष्चिमी राजनीतिक विचारक, काॅलेज बुक हाऊस, जयपुर, 2007, पृ, 19
वही, पृ. 20
बार्कर, ग्रीक पालिटिकल थ्योरी, लंदन, 1752, पृ. 153
फडिया, पृ. 20
बार्कर, पृ. 179
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