लघु उद्योगों की लाभप्रदता पर कार्यशील पूंजी प्रबंधन का प्रभाव : ग्वालियर संभाग के उद्योगों का विश्लेषणात्मक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.65578/kavyasetu.v2.i4.258Keywords:
लघु उद्योग, कार्यशील पूंजी, कार्यशील पूंजी प्रबंधन, लाभप्रदता, औद्योगिक विकासAbstract
भारत की औद्योगिक संरचना में लघु उद्योगों का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान है। ये उद्योग न केवल रोजगार सृजन का प्रमुख साधन हैं बल्कि क्षेत्रीय संतुलित विकास, स्थानीय संसाधनों के उपयोग तथा उद्यमिता के संवर्धन में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है क्योंकि यह क्षेत्र राष्ट्रीय आय, औद्योगिक उत्पादन तथा निर्यात में उल्लेखनीय योगदान देता है। लघु उद्योगों की सफलता अनेक वित्तीय तत्त्वों पर निर्भर करती है, जिनमें कार्यशील पूंजी प्रबंधन एक प्रमुख तत्त्व है। कार्यशील पूंजी उद्योग की दैनिक उत्पादन गतिविधियों के संचालन का आधार होती है। कच्चे माल की खरीद, मजदूरी भुगतान, उत्पादन प्रक्रिया का संचालन तथा तैयार माल के विपणन जैसी गतिविधियाँ कार्यशील पूंजी के माध्यम से ही संचालित होती हैं। यदि कार्यशील पूंजी का प्रबंधन प्रभावी ढंग से किया जाए तो उद्योग की उत्पादन क्षमता तथा लाभप्रदता में उल्लेखनीय वृद्धि संभव होती है। इसके विपरीत कार्यशील पूंजी की कमी या उसका कमजोर प्रबंधन उद्योगों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य ग्वालियर संभाग के लघु उद्योगों में कार्यशील पूंजी प्रबंधन की स्थिति का विश्लेषण करना तथा यह अध्ययन करना है कि कार्यशील पूंजी प्रबंधन का उद्योगों की लाभप्रदता पर किस प्रकार प्रभाव पड़ता है। अध्ययन में चयनित लघु उद्योगों से प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण सांख्यिकीय तकनीकों के माध्यम से किया गया है। अध्ययन के परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि जिन उद्योगों में कार्यशील पूंजी का प्रभावी प्रबंधन किया जाता है वहाँ उत्पादन क्षमता तथा लाभप्रदता का स्तर अपेक्षाकृत अधिक पाया जाता है। अतः लघु उद्योगों के समुचित विकास के लिए कार्यशील पूंजी प्रबंधन का विशेष महत्त्व है।
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