चरक-संहिता का स्वास्थ्य-दर्शन एवं आधुनिक जीवन-शैली

Authors

  • डॉ. सुमन

Keywords:

चरक-संहिता, स्वास्थ्य-दर्शन, प्रज्ञापराध, दिनचर्या एवं ऋतुचर्या, स्वस्थ भारत-समर्थ भारत, सद्वृत्त

Abstract

चरक-संहिता भारतीय ज्ञान-परंपरा का वह आधार ग्रंथ है जिसमें ‘स्वास्थ्य’ को मात्र रोग का अभाव न मानकर त्रिदोषों की साम्यावस्था तथा मन, इन्द्रिय एवं आत्मा की प्रसन्नता के समन्वित स्वरूप में परिभाषित किया गया है। प्रस्तुत शोध-लेख का उद्देश्य आचार्य चरक के स्वास्थ्य-दर्शन के विश्लेषण उपरांत यह स्पष्ट करना है कि आधुनिक जीवन-शैली से उत्पन्न शारीरिक एवं मानसिक व्याधियाँ वस्तुतः काल, अर्थ एवं कर्म के असंतुलित नियोजन तथा ‘प्रज्ञापराध’ का परिणाम हैं। इस शोध-लेख में दिनचर्या, ऋतुचर्या, सात्विक आहार एवं सद्वृत्त रूपी चरक-प्रतिपादित मार्ग को आधुनिक संदर्भ में पुनव्र्याख्यायित किया गया है तथा यह प्रतिपादित किया गया है कि व्यक्तिगत आरोग्य ही ‘स्वस्थ भारत-समर्थ भारत’ की अनिवार्य आवश्यकता है। निष्कर्षतः आयुर्वेद केवल चिकित्सा-पद्धति नहीं, अपितु प्रकृति, समाज एवं स्वयं के साथ संतुलन स्थापित करने वाली एक समग्र जीवन-कला है, जो ‘विकसित भारत’ के संकल्प को सुदृढ़ एवं मानवीय आधार प्रदान करती है।

References

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Published

25-06-2026

How to Cite

डॉ. सुमन. (2026). चरक-संहिता का स्वास्थ्य-दर्शन एवं आधुनिक जीवन-शैली. Kavya Setu, 2(6), 50–57. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/282

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