हिंदी सिनेमा में स्त्री की छविः परंपरा, परिवर्तन और समकालीन दृष्टिकोण

Authors

  • प्रोफेसर मीना यादव

Keywords:

हिंदी सिनेमा, स्त्री की छवि, सामाजिक परिवर्तन, नारी सशक्तिकरण, फिल्मी पात्र, परंपरा, आधुनिकता

Abstract

हिंदी सिनेमा में स्त्री की छवि समय के साथ बदलती रही है, जो भारतीय समाज की सांस्कृतिक और सामाजिक धारा को दर्शाती है। प्रारंभिक हिंदी फिल्मों में महिलाओं को आदर्श रूप में दिखाया गया, जैसे देवियाँ, माताएँ या पतिव्रता की भूमिकाओं में, जो समाज के नैतिक मूल्यों को बनाए रखने का प्रतीक होती थीं। 1950 और 1960 के दशकों में, फिल्मी सिनेमा में महिला पात्रों का चित्रण और अधिक जटिल और स्वतंत्र हुआ। महिलाएँ अब न केवल रोमांटिक नायिकाएँ होती थीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और व्यक्तिगत संघर्षों का प्रतिनिधित्व भी करने लगीं। समकालीन सिनेमा में, महिलाओं को स्वतंत्र, सशक्त और व्यक्तिगत निर्णय लेने वाली पात्रों के रूप में पेश किया जाता है, हालांकि कुछ रूढ़िवादी भूमिकाएँ आज भी बनी हुई हैं। इस प्रकार, हिंदी सिनेमा में स्त्री की छवि एक गतिशील और बदलते समाज की कहानी है।

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Published

28-04-2025

How to Cite

प्रोफेसर मीना यादव. (2025). हिंदी सिनेमा में स्त्री की छविः परंपरा, परिवर्तन और समकालीन दृष्टिकोण. Kavya Setu, 1(4), 22–29. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/28

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