समकालीन समाज में आध्यात्मिकता का बदलता स्वरूप, सामाजिक प्रभाव एवं मानव कल्याण में उसकी भूमिका

Authors

  • प्रतिभा शंकरराव साबले, डॉ. सोनाली पंडित

Keywords:

आध्यात्मिक कल्याण, मानव कल्याण, वैश्वीकरण, डिजिटल आध्यात्मिकता, व्यावसायीकरण, सामाजिक पूँजी, योग एवं ध्यान

Abstract

प्रस्तुत शोध-पत्र दो प्रश्नों का विश्लेषण करता है—प्रथम, आध्यात्मिक पद्धतियाँ मानव कल्याण के मानसिक, शारीरिक, सामाजिक तथा विकासात्मक आयामों को किस प्रकार प्रभावित करती हैं; तथा द्वितीय, वैश्वीकरण, शहरीकरण, उपभोक्तावाद, डिजिटल प्रौद्योगिकी तथा व्यावसायीकरण जैसी समकालीन शक्तियाँ आध्यात्मिकता के स्वरूप तथा उसके कल्याण-प्रभाव को किस प्रकार बदल रही हैं। निष्कर्ष दर्शाते हैं कि योग एवं ध्यान तनाव, चिंता, अवसाद, पीठ-दर्द तथा हृदय-रोग के जोखिम-कारकों में मध्यम सुधार से जुड़े हैं, जबकि सामुदायिक आध्यात्मिक सहभागिता सामाजिक विश्वास तथा सामाजिक पूँजी को सुदृढ़ करती है। साथ ही, आध्यात्मिकता का बाज़ारीकरण तथा डिजिटल उपभोग उसके नैतिक एवं सामुदायिक आधार को क्षीण कर सकता है। शोध-पत्र संतुलित, सामुदायिक तथा साक्ष्य-आधारित आध्यात्मिक अभ्यास के संवर्धन हेतु सुझाव प्रस्तुत करता है।

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प्रतिभा शंकरराव साबले, डॉ. सोनाली पंडित. (2026). समकालीन समाज में आध्यात्मिकता का बदलता स्वरूप, सामाजिक प्रभाव एवं मानव कल्याण में उसकी भूमिका. Kavya Setu, 2(3), 284–295. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/399

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