दिनकर की काव्य–दृष्टि में राष्ट्रवाद, विद्रोह और सामाजिक न्याय का अध्ययन

Authors

  • डॉ.रवीन्द्र कुमार मीना

Keywords:

राष्ट्रवाद, विद्रोह, सामाजिक न्याय, काव्य–दृष्टि, दिनकर

Abstract

प्रस्तुत शोध-पत्र रामधारी सिंह दिनकर की काव्य–दृष्टि में निहित राष्ट्रवाद, विद्रोह और सामाजिक न्याय की अवधारणाओं का समग्र एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। दिनकर की कविता भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, सामाजिक विषमता और राजनीतिक चेतना से गहराई से जुड़ी हुई है, जहाँ राष्ट्रवाद सांस्कृतिक स्वाभिमान और जन–आकांक्षाओं के रूप में उभरता है। उनका विद्रोही स्वर शोषण, अन्याय और दमनकारी सत्ता संरचनाओं के विरुद्ध नैतिक प्रतिरोध का प्रतीक है, जो सामाजिक परिवर्तन की आकांक्षा को अभिव्यक्त करता है। साथ ही, सामाजिक न्याय की अवधारणा दिनकर के काव्य में वंचित, श्रमिक और कृषक वर्गों की पीड़ा तथा समानता–आधारित समाज की कल्पना के माध्यम से प्रतिफलित होती है। यह अध्ययन दिनकर की काव्य–दृष्टि को ऐतिहासिक, सामाजिक और वैचारिक संदर्भों में रखकर यह स्पष्ट करता है कि उनकी कविता केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि भारतीय समाज के लिए एक जागरूक वैचारिक हस्तक्षेप है।

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Published

02-12-2025

How to Cite

डॉ.रवीन्द्र कुमार मीना. (2025). दिनकर की काव्य–दृष्टि में राष्ट्रवाद, विद्रोह और सामाजिक न्याय का अध्ययन. Kavya Setu, 1(12), 01–14. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/113

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