डॉ. रामकुमार वर्मा के ऐतिहासिक नाटकों में मानवीय मूल्य और युगीन बोध।
Keywords:
ऐतिहासिक नाटक, मानवीय मूल्य, युगीन बोध, डॉ. रामकुमार वर्मा, सम्राट कनिष्क, शिवाजी।Abstract
प्रस्तुत शोध पत्र डॉ. रामकुमार वर्मा के ऐतिहासिक नाटकों “सम्राट कनिष्क” तथा “शिवाजी”के आलोक में मानवीय मूल्यों और युगीन बोध के गहन विश्लेषण का प्रयास है। वर्मा जी ने इतिहास को केवल घटनाओं का क्रम न मानकर उसे मानव-चेतना, नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संवाहक के रूप में प्रस्तुत किया है। इस अध्ययन का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि वर्मा जी के नाटकों में प्रतिपादित नैतिक मूल्य—जैसे कर्तव्यबोध, करुणा, न्याय, सहिष्णुता, राष्ट्रप्रेम और आत्मबलिदान आधुनिक समाज में भी कितने प्रासंगिक और आवश्यक हैं।
References
वर्मा, रामकुमार. सम्राट कनिष्क. इलाहाबाद: लोकभारती प्रकाशन, 1956, पृ. 1–120.
वर्मा, रामकुमार. शिवाजी. वाराणसी: भारतीय ज्ञानपीठ, 1960, पृ. 1–135.
मिश्र, रामस्वरूप. हिंदी ऐतिहासिक नाटक परंपरा. दिल्ली: राजकमल प्रकाशन, 1985, पृ. 45–92.
शुक्ल, रामचंद्र. हिंदी साहित्य का इतिहास. काशी: नागरी प्रचारिणी सभा, 2004 (पुनर्मुद्रण), पृ. 312–330.
सिंह, बच्चन. आधुनिक हिंदी नाटक: प्रवृत्तियाँ और मूल्य. दिल्ली: नेशनल पब्लिशिंग हाउस, 1992, पृ. 101–158.
वर्मा, धीरेंद्र. नाटक और युगबोध. इलाहाबाद: साहित्य भवन, 1978, पृ. 66–110.
त्रिपाठी, शिवकुमार. भारतीय संस्कृति और नाट्यचेतना. लखनऊ: नवभारत प्रकाशन, 1990, पृ. 201–245.
द्विवेदी, हजारीप्रसाद. साहित्य और समाज. दिल्ली: राजकमल प्रकाशन, 1983, पृ. 55–88.
पांडेय, सुधाकर. इतिहास और साहित्य का अंतर्संबंध. पटना: बिहार हिंदी ग्रंथ अकादमी, 1995, पृ. 140–176.
जोशी, मोहनलाल. नाट्य-साहित्य में नैतिक मूल्य. जयपुर: संकेत प्रकाशन, 2001, पृ. 23–67.
Downloads
Published
How to Cite
Issue
Section
License
Copyright (c) 2026 Kavya Setu

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.