उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में बाल अपराध की प्रवृत्ति, कारण एवं समकालीन परिप्रेक्ष्य: शालीमार गार्डन क्षेत्र के विशेष संदर्भ में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Authors

  • रोहित कुमार, डॉ. श्याम लाल

DOI:

https://doi.org/10.65578/kavyasetu.v2.i3.179

Keywords:

बाल अपराध, गाजियाबाद जिला, राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (NCRB), किशोर न्याय प्रणाली, सामाजिक परिवर्तन, शहरीकरण, अपराध की प्रवृत्तियाँ

Abstract

बाल अपराध (Juvenile Delinquency) आधुनिक समाज की एक जटिल और बहुआयामी सामाजिक समस्या है, जिसका संबंध सामाजिक संरचना, पारिवारिक परिवेश, आर्थिक असमानता, मनोवैज्ञानिक स्थिति तथा सांस्कृतिक परिवर्तन से गहराई से जुड़ा हुआ है। वैश्वीकरण, तीव्र शहरीकरण तथा आधुनिक जीवन शैली के प्रभाव से किशोरों के व्यवहार में तीव्र परिवर्तन देखने को मिल रहा है, जिसके परिणामस्वरूप बाल अपराध की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। प्रस्तुत शोध पत्र उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के शालीमार गार्डन क्षेत्र में बाल अपराध की प्रवृत्तियों, कारणों तथा सामाजिक प्रभावों का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है।

अध्ययन का मुख्य उद्देश्य बाल अपराध की प्रकृति को समझना, उसके सामाजिक-आर्थिक कारणों का विश्लेषण करना तथा आधुनिकता के प्रभाव को पहचानना है। इस शोध में द्वितीयक स्रोतों जैसे राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट, सरकारी दस्तावेज, समाजशास्त्रीय साहित्य, विधिक अधिनियम तथा शोध पत्रों का उपयोग किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि 16–18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों में अपराध की प्रवृत्ति अधिक पाई जाती है तथा इसके पीछे पारिवारिक विघटन, गरीबी, बेरोजगारी, गलत संगति, नशे की प्रवृत्ति, सामाजिक नियंत्रण की कमी तथा डिजिटल माध्यमों का प्रभाव प्रमुख कारण हैं।

अध्ययन यह भी दर्शाता है कि भारतीय किशोर न्याय प्रणाली दंडात्मक न होकर सुधारात्मक है, जिसका उद्देश्य बाल अपराधियों को दंडित करने के बजाय उन्हें समाज की मुख्यधारा में पुनः स्थापित करना है। यदि परिवार, समाज, विद्यालय, प्रशासन तथा सरकार मिलकर कार्य करें तो बाल अपराध की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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Published

04-03-2026

How to Cite

रोहित कुमार, डॉ. श्याम लाल. (2026). उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में बाल अपराध की प्रवृत्ति, कारण एवं समकालीन परिप्रेक्ष्य: शालीमार गार्डन क्षेत्र के विशेष संदर्भ में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. Kavya Setu, 2(3), 01–11. https://doi.org/10.65578/kavyasetu.v2.i3.179

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