हिंदी भाषा का विकास प्राचीन से आधुनिक काल तक एक ऐतिहासिक अध्ययन

Authors

  • डॉ. शेखर शर्मा

Keywords:

हिंदी भाषा, भाषाई विकास, प्राकृत-अपभ्रंश, भक्ति आंदोलन, खड़ी बोली

Abstract

हिंदी भाषा का विकास प्राचीन काल से आधुनिक युग तक एक निरंतर ऐतिहासिक प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है, जिसकी जड़ें वैदिक संस्कृत में निहित हैं। संस्कृत से प्राकृत और अपभ्रंश के माध्यम से हिंदी का प्रारंभिक स्वरूप विकसित हुआ। मध्यकाल में अवधी और ब्रजभाषा जैसी बोलियों के माध्यम से हिंदी ने साहित्यिक रूप प्राप्त किया, जिसमें भक्ति आंदोलन का महत्वपूर्ण योगदान रहा; कबीर, तुलसीदास और सूरदास ने इसे जनभाषा के रूप में स्थापित किया। आधुनिक काल में खड़ी बोली हिंदी के उदय के साथ भाषा का मानकीकरण हुआ, जिसमें भारतेंदु हरिश्चंद्र और महावीर प्रसाद द्विवेदी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। स्वतंत्रता के बाद हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला और आज यह वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना रही है।

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How to Cite

डॉ. शेखर शर्मा. (2026). हिंदी भाषा का विकास प्राचीन से आधुनिक काल तक एक ऐतिहासिक अध्ययन. Kavya Setu, 2(2), 105–114. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/221

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Original Research Articles