गुरु तेग बहादुर का जीवन, संघर्ष और शहादत: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Keywords:
गुरु तेग बहादुर, भाई जैता, औरंगज़ेब, धार्मिक स्वतंत्रता, शहादत, सिख इतिहास, रंगरेट्टेAbstract
यह शोधपत्र मुगल सम्राट औरंगज़ेब की धार्मिक नीतियों, गुरु तेग बहादुर की शहादत तथा भाई जैता की ऐतिहासिक भूमिका का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि गुरु तेग बहादुर का बलिदान केवल किसी एक समुदाय की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता, मानवाधिकार तथा अंतरात्मा की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए था। इस संघर्ष में भाई जैता ने असाधारण साहस, निष्ठा और समर्पण का परिचय देते हुए गुरु तेग बहादुर के पावन शीश को दिल्ली से आनंदपुर साहिब तक सुरक्षित पहुँचाया। गुरु गोबिंद सिंह द्वारा उन्हें "रंगरेट्टे गुरु के बेटे" की उपाधि प्रदान करना सामाजिक समानता तथा जातिगत भेदभाव के विरुद्ध सिख दर्शन का सशक्त उदाहरण है। शोध में प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों के आधार पर भाई जैता के योगदान का ऐतिहासिक पुनर्मूल्यांकन किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि भाई जैता का योगदान भारतीय इतिहास, धार्मिक स्वतंत्रता और सिख परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
References
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