हरियाणा की साहित्यिक परंपरा और इसके विकास का अध्ययन: हरेराम समीप के आंधियों के दौर में तथा राजेश्वर वशिष्ठ के सुनो वाल्मीकि के विशेष संदर्भ में

Authors

  • डॉ० जयकरण यादव
  • अमन कुमारी

Keywords:

हरियाणा, साहित्यिक परंपरा, लोक साहित्य, आधुनिक हिन्दी कविता, हरेराम समीप, आंधियों के दौर में, राजेश्वर वशिष्ठ, सुनो वाल्मीकि, दलित विमर्श, सामाजिक चेतना

Abstract

हरियाणा भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यह प्रदेश केवल ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि साहित्यिक दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध रहा है। वैदिक काल से लेकर आधुनिक युग तक हरियाणा की साहित्यिक परंपरा ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। इस परंपरा का आधार लोकजीवन, लोकसंस्कृति, धार्मिक चेतना, वीरता, कृषि संस्कृति, सामाजिक यथार्थ तथा मानवीय मूल्यों पर आधारित रहा है। हरियाणा की साहित्यिक धारा में लोकगीत, लोककथाएँ, सांग, रागनी, संत साहित्य, आधुनिक कविता तथा समकालीन विमर्शों का समन्वय मिलता है।

प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य हरियाणा की साहित्यिक परंपरा एवं उसके विकास का अध्ययन करना है। साथ ही हरेराम समीप की काव्य-कृति 'आंधियों के दौर में' तथा राजेश्वर वशिष्ठ की कृति 'सुनो वाल्मीकि' के आधार पर यह स्पष्ट करना है कि आधुनिक हरियाणवी हिन्दी साहित्य किस प्रकार सामाजिक परिवर्तन, लोकतांत्रिक चेतना, दलित विमर्श, मानवीय समानता तथा सांस्कृतिक अस्मिता को अभिव्यक्त करता है।

हरेराम समीप की कविता सामाजिक विसंगतियों, राजनीतिक भ्रष्टाचार, जन-संघर्ष तथा मानवीय संवेदनाओं की मुखर अभिव्यक्ति है। दूसरी ओर राजेश्वर वशिष्ठ की सुनो वाल्मीकि दलित चेतना, सामाजिक न्याय, आत्मसम्मान तथा ऐतिहासिक पुनर्पाठ का सशक्त दस्तावेज है। दोनों कृतियाँ आधुनिक हरियाणा के साहित्य को नई दिशा प्रदान करती हैं। यह अध्ययन ऐतिहासिक, विश्लेषणात्मक तथा तुलनात्मक पद्धति पर आधारित है।

References

समीप, हरेराम। आंधियों के दौर में। नई दिल्ली: प्रकाशक, संस्करणानुसार।

वशिष्ठ, राजेश्वर। सुनो वाल्मीकि। नई दिल्ली: प्रकाशक, संस्करणानुसार।

शुक्ल, आचार्य रामचन्द्र। हिन्दी साहित्य का इतिहास। नागरी प्रचारिणी सभा।

द्विवेदी, हजारी प्रसाद। हिन्दी साहित्य की भूमिका।

नामवर सिंह। कविता के नए प्रतिमान।

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How to Cite

डॉ० जयकरण यादव, & अमन कुमारी. (2026). हरियाणा की साहित्यिक परंपरा और इसके विकास का अध्ययन: हरेराम समीप के आंधियों के दौर में तथा राजेश्वर वशिष्ठ के सुनो वाल्मीकि के विशेष संदर्भ में. Kavya Setu, 2(7), 45–67. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/309

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