ब्रिक्स सम्मेलन एवं वैश्विक आर्थिक परिदृश्य: भारत के लिए अवसर और चुनौतियाँ
Keywords:
ब्रिक्स, भारत, वैश्विक आर्थिक परिदृश्य, वैश्विक दक्षिण, आर्थिक सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सतत विकास, स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, अवसर एवं चुनौतियाँ।Abstract
वर्तमान वैश्विक आर्थिक एवं भू-राजनीतिक परिदृश्य में ब्रिक्स एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच के रूप में उभरकर सामने आया है। वर्ष 2026 में भारत ने ब्रिक्स की अध्यक्षता की तथा 12–13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। भारत की अध्यक्षता का प्रमुख विषय “सक्षमता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास” रहा, जिसने वैश्विक दक्षिण, समावेशी विकास, आर्थिक सहयोग, प्रौद्योगिकी, जलवायु कार्रवाई तथा बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे विषयों को प्रमुखता प्रदान की।प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में ब्रिक्स की बढ़ती भूमिका तथा भारत के लिए उससे उत्पन्न होने वाले आर्थिक, कूटनीतिक, तकनीकी और सामरिक अवसरों एवं चुनौतियों का विश्लेषण करना है। अध्ययन में पूर्णतः द्वितीयक आंकड़ों का उपयोग किया गया है। विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, ब्रिक्स के आधिकारिक दस्तावेजों, न्यू डेवलपमेंट बैंक तथा प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों एवं शोध-सामग्रियों को अध्ययन के प्रमुख स्रोत के रूप में लिया गया है।अध्ययन में विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के हितों की अभिव्यक्ति, व्यापार एवं निवेश, स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन, स्वच्छ ऊर्जा, सतत विकास लक्ष्य, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद एवं आतंकवादी वित्तपोषण तथा वैश्विक आर्थिक शासन में सुधार जैसे विषयों का विश्लेषण किया गया है। भारत के लिए ब्रिक्स एक ऐसा मंच प्रस्तुत करता है जिसके माध्यम से वह विकासशील देशों के हितों को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त कर सकता है। 2026 की नई दिल्ली घोषणा में वैश्विक आर्थिक शासन में विकासशील एवं उभरती अर्थव्यवस्थाओं की अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण भूमिका, सतत विकास तथा बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार पर बल दिया गया।
ब्रिक्स भारत के समक्ष अनेक चुनौतियाँ भी प्रस्तुत करता है। चीन का आर्थिक एवं राजनीतिक प्रभाव, भारत-चीन सीमा विवाद, आतंकवाद के प्रश्न पर सदस्य देशों के बीच मतभेद, रूस के साथ भारत के बढ़ते आर्थिक संबंधों के संदर्भ में अमेरिकी व्यापारिक नीतियाँ तथा वैश्विक संरक्षणवाद ऐसी प्रमुख चुनौतियाँ हैं जिनका भारत को संतुलित कूटनीति के माध्यम से सामना करना होगा। ब्रिक्स भारत के लिए अवसरों का महत्वपूर्ण मंच है, किंतु इसके प्रभावी उपयोग के लिए आर्थिक क्षमता, कूटनीतिक संतुलन, तकनीकी आत्मनिर्भरता तथा बहुपक्षीय सहयोग को समान रूप से सुदृढ़ करना आवश्यक है।
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