भारतीय संगीत पर लोक साहित्य का प्रभाव
Keywords:
लोक साहित्य, भारतीय संगीत, लोकगीत, सांस्कृतिक प्रभाव, भक्ति आंदोलनAbstract
भारतीय संगीत और लोक साहित्य का संबंध अत्यंत गहरा और अविभाज्य है। लोक साहित्य, जो जनजीवन की संवेदनाओं, आस्थाओं और परंपराओं का सजीव प्रतिबिंब है, ने भारतीय संगीत को समृद्ध आधार और सहजता प्रदान की है। श्रम, उत्सव, विवाह, ऋतु और धार्मिक अनुष्ठानों में गाए जाने वाले लोकगीत धीरे-धीरे शास्त्रीय संगीत की संरचना और राग-रागिनियों में समाहित हुए, जिससे भारतीय संगीत अधिक भावनात्मक और जनसुलभ बन गया। भक्ति आंदोलन ने इस प्रभाव को और प्रबल किया, जब संत कवियों ने लोकभाषा और लोकधुनों के माध्यम से आध्यात्मिक संदेश जनमानस तक पहुँचाए। क्षेत्रीय विविधताओं ने संगीत को अनेक रंग प्रदान किए, जिससे वह बहुआयामी और व्यापक स्वरूप में विकसित हुआ। आधुनिक समय में भी लोकधुनों का प्रभाव फिल्मी संगीत और फ्यूज़न संगीत में दिखाई देता है। इस प्रकार, लोक साहित्य ने भारतीय संगीत को न केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गहराई दी, बल्कि उसे समाज की आत्मा से जोड़कर कालजयी बना दिया।
References
सिंह, जी. एच. (2022). भारतीय लोकगीतों का सांस्कृतिक लोकाचार। नाद-नर्तन जर्नल ऑफ डांस एंड म्यूजिक, 10(2)।
सैयद, एस. (2024). भारत के आदिवासी लोकगीत-महत्व और प्रभाव।
कुमार, एन., चौहान, जी., और पारिख, टी. (2011, मई)। भारत में लोक संगीत डिजिटल हो रहा है। कंप्यूटिंग सिस्टम में मानव कारकों पर SIGCHI सम्मेलन की कार्यवाही में (पृष्ठ 1423-1432)।
फियोल, एस. (2017). हिमालय में लोक संगीत का पुनर्निर्माण: भारतीय संगीत, मीडिया और सामाजिक गतिशीलता। इलिनोइस विश्वविद्यालय प्रेस।
आलम, बी., दुबे, पी. के., शुक्ला, ए. के., और कुमारी, जे. (2023)। ग्रामीण भारत में जनसंचार के माध्यम के रूप में लोकगीतों की भूमिका को समझना। जर्नल ऑफ सर्वे इन फिशरीज साइंसेज, 10(1), 3909-3915।
ओझा, पी. (2020)। भारत में लोक साहित्य और स्थानीय भाषाओं का उदय-निष्कर्ष और विश्लेषण। SSRN 3670562 पर उपलब्ध है।
कुमार, ए., और आलम, बी. (2023)। भारतीय मुक्ति संग्राम के दौरान लोकप्रिय संस्कृति के रूप में लोक मीडिया के कार्य को समझना। इंटरनेशनल जर्नल फॉर मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च (IJFMR), 5(5), 1-12।
गायत्री, एस. (2024)। साहित्य के एक महत्वपूर्ण प्रकार के रूप में लोक साहित्य: अरब में मौखिक कविता और लोक कथाओं की एक जाँच। पाकिस्तान जर्नल ऑफ लाइफ एंड सोशल साइंसेज, 22(2)।
तोशा, एम. (2023)। व्यक्तित्व के माध्यम से बोध: बिहार, भारत से बच्चों के लोकगीतों का एक अध्ययन। आईएएफओआर जर्नल ऑफ लिटरेचर एंड लाइब्रेरियनशिप, 12(1)।
रॉय, पी. (2021)। बंगाल का लोक संगीत और रवींद्रनाथ के गीत: प्रभाव और रहस्योद्घाटन। रोमानियन जर्नल ऑफ इंडियन स्टडीज, 1(1), 105-110।
रॉय, एस., और घोष, टी. (2019)। लोकगीतों पर ताल संगत का प्रभाव, अर्ध-शास्त्रीय संगीत के रूप में इसके विकास में। संगीत गैलेक्सी, 8(1)।
चटर्जी, आर. (2016)। लोकगीतों की पटकथा: बंगाल में इतिहास, लोककथाएँ और स्थान की कल्पना। मानव विज्ञान की वार्षिक समीक्षा, 45(1), 377-394।
घोष, ए., ढेरे, ए., और अली, एस. ए. (2024)। भारत में लोकगीतों का पुनर्निर्माण: सांस्कृतिक विनियोग, पारंपरिक अभिव्यक्तियाँ और कॉपीराइट दुविधा। जर्नल ऑफ इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (जेआईपीआर), 29(4), 314-324।
कांबले, वी. सी., और रानसुरे, पी. (2008)। महाराष्ट्र की लोक और लोक-कथा संस्कृति। डेक्कन कॉलेज रिसर्च इंस्टीट्यूट का बुलेटिन, 68, 191-205।
जैन, पी. सी. (2007)। लोक साहित्य और सांस्कृतिक एकीकरण। भारतीय जनजातियों की सांस्कृतिक विरासत, 266।
Downloads
Published
How to Cite
Issue
Section
License
Copyright (c) 2025 Kavya Setu

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.