‘बहु-जुठाई’ में पारिवारिक संरचना के भीतर स्त्री की पीड़ा और संघर्ष

Authors

  • डाॅ. नवीन

Keywords:

रेणुका गुप्ता, बहु-जुठाई, स्त्री शोषण, पितृसत्तात्मक समाज, पारिवारिक उत्पीड़न, स्त्री चेतना, लैंगिक असमानता, मानसिक पीड़ा, सामाजिक यथार्थ, स्त्री संघर्ष

Abstract

प्रस्तुत शोध रेणुका गुप्ता के कहानी-संग्रह ‘बहु-जुठाई’ में चित्रित स्त्री शोषण का समीक्षात्मक अध्ययन करता है। यह अध्ययन विशेष रूप से पारिवारिक ढाँचे के भीतर स्त्री की सामाजिक, मानसिक और भावनात्मक पीड़ा को केंद्र में रखता है। कहानियों के माध्यम से लेखिका ने यह स्पष्ट किया है कि स्त्री शोषण केवल बाहरी समाज तक सीमित नहीं, बल्कि घर की चारदीवारी के भीतर भी वह निरंतर उपेक्षा, अत्याचार और असमानता का शिकार होती है। शोध में यह दर्शाया गया है कि स्त्री को पारंपरिक भूमिकाओं में बाँधकर उसकी स्वतंत्रता और पहचान को सीमित किया जाता है। विवाह, ससुराल, आर्थिक निर्भरता और पितृसत्तात्मक सोच स्त्री के जीवन को नियंत्रित करती है। लेखिका ने यथार्थवादी शैली में स्त्री के अंतर्द्वंद्व, मौन पीड़ा और आत्मसंघर्ष को उकेरा है। यह अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि ‘बहु-जुठाई’ केवल कथा-संग्रह नहीं, बल्कि स्त्री चेतना का सशक्त दस्तावेज है, जो समाज में व्याप्त लैंगिक असमानता और शोषण की प्रवृत्तियों पर गहरा प्रश्नचिह्न लगाता है। आधुनिक संदर्भ में यह रचना स्त्री सशक्तिकरण और समान अधिकारों की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

References

रमणिका गुप्ता, बहू-जुठाई, भूमिका: खटने कमाने वाली औरते षिल्पायन प्रकाषन, पृ. 10

रमणिका गुप्ता, बहू-जुठाई (प्यारी), पृ. 102

रमणिका गुप्ता, बहू-जुठाई (परबतिया), पृ. 67

रमणिका गुप्ता, बहू-जुठाई, जिरवा और जिरवामाय, पृ. 80

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Published

18-01-2026

How to Cite

डाॅ. नवीन. (2026). ‘बहु-जुठाई’ में पारिवारिक संरचना के भीतर स्त्री की पीड़ा और संघर्ष. Kavya Setu, 2(1), 40–44. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/134

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Original Research Articles