आर्थिक और शहरी परिवर्तन: दिल्ली सल्तनत काल का अध्ययन
Keywords:
दिल्ली सल्तनत, आर्थिक परिवर्तन, शहरीकरण, कृषि व्यवस्था, व्यापार और वाणिज्य, बाजार नियंत्रण, मध्यकालीन भारतीय अर्थव्यवस्था, शहरी प्रशासन।Abstract
दिल्ली सल्तनत काल (1206-1526 ई.) भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण चरण था, जिसमें व्यापक आर्थिक पुनर्गठन और तीव्र शहरी परिवर्तन देखने को मिलते हैं। इस काल में सुल्तानों द्वारा स्थापित केंद्रीकृत प्रशासनिक व्यवस्था ने राजस्व संग्रह, बाजार नियंत्रण तथा आर्थिक गतिविधियों पर राज्य के हस्तक्षेप को सुदृढ़ किया। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य दिल्ली सल्तनत काल के आर्थिक परिवर्तनों और शहरी विकास की प्रकृति का विश्लेषण करना तथा यह समझना है कि इन परिवर्तनों का भारतीय समाज पर क्या प्रभाव पड़ा। कृषि इस काल की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार थी, किंतु ख़राज, ख़ुम्स तथा अन्य भूमि करों की व्यवस्थित व्यवस्था ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषकदृराज्य संबंधों को नई दिशा दी। इसके साथ ही आंतरिक एवं बाह्य व्यापार का विस्तार हुआ। सुरक्षित मार्गों, सरायों तथा संगठित बाजार व्यवस्था के कारण भारत मध्य एशिया, पश्चिम एशिया और समुद्री व्यापार मार्गों से जुड़ गया। मुद्रा प्रणाली में सुधार और मानकीकृत सिक्कों के प्रचलन से वाणिज्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिला। शहरीकरण दिल्ली सल्तनत काल की एक प्रमुख विशेषता के रूप में उभरा। दिल्ली, लाहौर, मुल्तान और दौलताबाद जैसे नगर राजनीतिक, सैन्य तथा आर्थिक केंद्र बन गए। नगरों में शिल्प, उद्योग और सेवाओं के विकास से व्यापारियों, कारीगरों और मजदूर वर्ग का उदय हुआ। शहरी प्रशासन ने बाजार नियंत्रण, मूल्य निर्धारण और नागरिक व्यवस्था को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अध्ययन यह निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि दिल्ली सल्तनत काल के आर्थिक और शहरी परिवर्तनों ने न केवल राज्य की शक्ति को सुदृढ़ किया, बल्कि सामाजिक संरचना, जीवन शैली और आर्थिक संबंधों को भी गहराई से प्रभावित किया। ये परिवर्तन मध्यकालीन भारतीय समाज के विकास में एक निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
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