महादेवी वर्मा के काव्य और उनके भावनात्मक संसार की विश्लेषण

Authors

  • Kusum, Dr. Anupam Kumar

Keywords:

महादेवी वर्मा, काव्य, भावनात्मक संसार, छायावाद, प्रेम, विरह, स्त्री विमर्श, आत्मविश्लेषण, हिंदी साहित्य

Abstract

महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की एक महान कवयित्री और छायावाद की प्रमुख प्रतिनिधि थीं। उनके काव्य में गहरी भावनात्मकता, नारीवाद, प्रेम, दुःख और आत्मविश्लेषण की अनोखी अभिव्यक्तियाँ हैं। इस शोधपत्र का उद्देश्य महादेवी वर्मा के काव्य और उनके भावनात्मक संसार का विश्लेषण करना है। उनकी कविताओं में प्रेम, विरह, तन्हाई, और आत्मबोध के विषयों का महत्वपूर्ण स्थान है, जो उनके व्यक्तिगत संघर्षों और समाज के प्रति दृष्टिकोण को प्रकट करते हैं। महादेवी वर्मा ने न केवल स्त्री के मानसिक और भावनात्मक पहलुओं का चित्रण किया, बल्कि समाज में महिलाओं के स्थान और उनके अधिकारों पर भी गहरी सोच प्रस्तुत की। उनका काव्य शास्त्र, शैली, और भाषा की विशेषताएँ दर्शाती हैं कि कैसे उन्होंने छायावाद के तत्वों का उपयोग किया और अपनी भावनाओं को काव्य रूप में ढाला। इस शोधपत्र में महादेवी वर्मा की कविता के उन प्रमुख पहलुओं पर प्रकाश डाला जाएगा, जो उनके भावनात्मक संसार को व्यक्त करते हैं और हिंदी साहित्य में उनका योगदान स्थापित करते हैं।

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Published

15-10-2025

How to Cite

Kusum, Dr. Anupam Kumar. (2025). महादेवी वर्मा के काव्य और उनके भावनात्मक संसार की विश्लेषण. Kavya Setu, 1(10), 102–118. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/140

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