शिवप्रसाद कृत ‘शैलूष’ उपन्यास में नट जनजाति की सभ्यता एवं संस्कृति

Authors

  • डाॅ. नांग सुलिना चाउतांग

Keywords:

भारतीय संस्कृति, नट जनजाति, जीवन मूल्य, सभ्यता एवं संस्कृति

Abstract

भारतीय समाज संस्कृति और सभ्यता की दृष्टि से विविधता को धारण किया हुआ है और इस विविधता के दर्शन में एकता के कई मूल्य निहित है। भारतीय समाज की विविधता विभिन्न धर्म, वर्ण, वर्ग, सम्प्रदाय, पन्थ और जातियों के अपने संस्कारों और नैतिक-अनैतिक मूल्यों के आधारों पर निर्मित हुई है। भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में विभिन्न सामाजिक वर्गों की अनेक कोटियां विद्यमान हैं। इसी का एक हिस्सा जनजातीय समूहों का है, जिनका हमारे समाज में ऐतिहासिक दृष्टि से एक व्यापक समाज-सांस्कृतिक परिदृश्य है। प्राचीन युग से लेकर आज तक के विज्ञान युग में जनजातीय समुदायों का देश के अलग-अलग क्षेत्र, भूप्रदेश, जंगल, पहाड़ तथा दूरदराज के इलाकों में बसेरा रहा हैं। जिस जनजाति का जहाँ निवास रहा है, वहाँ पर उस जनजाति की अपनी विशिष्ट संस्कृति और सभ्यता विकसित होती रही है। प्रायः आज भी भारतीय समाज की जनजातियों में ऐतिहासिक तथ्यों, जीवन मूल्यों-सन्दर्भों एवं आचार-विचारों आदि में विभिन्नता दिखाई देती है। देश की सभी जनजातियाँ विभिन्नता के दर्शन की परिचायक रही हैं। यद्यपि प्रत्येक जनजाति अपनी-अपनी अलग पहचान रखते हुए भी भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। प्रस्तुत आलेख में शिवप्रसाद कृत ‘शैलूष’ उपन्यास में नट जनजाति की सभ्यता एवं संस्कृति को दिखाया गया है।

References

शिवप्रसाद सिंह, शैलूष, भूमिका, पृ. XV

सत्यदेव त्रिमूर्ति, शिवप्रसाद सिंह का परावर्तक कथा साहित्य, पृ0 139

शिवप्रसाद सिंह, शैलूष, पृ. 258

वही, पृ. 149, 150

वही, पृ. 160

सत्यदेव त्रिमूर्ति, शिवप्रसाद सिंह का परावर्तक कथा साहित्य, पृ. 143

शिवप्रसाद सिंह, शैलूष, पृ. 178

वही, पृ. 177

वही, पृ. 179

वही, पृ 243

Downloads

Published

16-01-2026

How to Cite

डाॅ. नांग सुलिना चाउतांग. (2026). शिवप्रसाद कृत ‘शैलूष’ उपन्यास में नट जनजाति की सभ्यता एवं संस्कृति. Kavya Setu, 2(1), 138–142. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/164

Issue

Section

Original Research Articles

Similar Articles

1 2 3 4 5 6 7 8 > >> 

You may also start an advanced similarity search for this article.