भारतीय बैंकिंग प्रणाली में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों की समस्या एवं समाधान का विश्लेषणात्मक अध्ययन

Authors

  • डॉ. धीरज कुमार शर्मा

Keywords:

एनपीए, बैंकिंग प्रणाली, दिवालियापन संहिता (प्ठब्), वसूली दर, वित्तीय स्थिरता, ऋण प्रबंधन

Abstract

भारतीय बैंकिंग प्रणाली में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों की समस्या वित्तीय स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती रही है। इस शोधपत्र का उद्देश्य भारतीय बैंकिंग प्रणाली में एनपीए की प्रवृत्तियों, उनके कारणों, प्रभावों तथा समाधानात्मक उपायों का विश्लेषण करना है। अध्ययन में वर्ष 2014 से 2025 तक के द्वितीयक आँकड़ों का उपयोग किया गया है, जिनमें सकल एनपीए, एनपीए अनुपात, वसूली दर तथा दिवाला एवं दिवालियापन संहिता  के परिणामों का विश्लेषण शामिल है। अध्ययन से ज्ञात हुआ कि वर्ष 2018 तक एनपीए में वृद्धि हुई, परंतु उसके बाद दिवालियापन संहिता अधिनियम तथा त्ठप् के सख्त नियमन के कारण इसमें निरंतर कमी आई है। निष्कर्षतः, समयबद्ध समाधान तंत्र, प्रभावी ऋण मूल्यांकन तथा सुदृढ़ निगरानी प्रणाली एनपीए नियंत्रण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

References

Reserve Bank of India (RBI). (2025). Report on Trends and Progress of Banking in India.

Ministry of Finance, Government of India. (2024). IBC Performance Report.

World Bank. (2023). Global Insolvency and Recovery Statistics.

Reserve Bank of India. (2025). Financial Stability Report.

Government of India. (2024). Public Sector Bank NPA Data Report.

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Published

02-04-2026

How to Cite

डॉ. धीरज कुमार शर्मा. (2026). भारतीय बैंकिंग प्रणाली में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों की समस्या एवं समाधान का विश्लेषणात्मक अध्ययन. Kavya Setu, 2(4), 1–8. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/195

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