चित्रा मुद्गल एवं गीतांजलि श्री की कहानियों का तुलनात्मक अध्ययन

Authors

  • Patil Dhanashree Diliprao, Dr. Rajendra Kashinath Baviskar

Keywords:

स्त्री-विमर्श, कथा-दृष्टि, तुलनात्मक अध्ययन, सामाजिक यथार्थ, मनोवैज्ञानिक विश्लेषण

Abstract

चित्रा मुद्गल एवं गीतांजलि श्री की कहानियों का यह तुलनात्मक अध्ययन समकालीन हिंदी कथा-साहित्य में उनकी विशिष्ट कथा-दृष्टि, विषयवस्तु और शिल्पगत विशेषताओं का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस शोध का उद्देश्य दोनों लेखिकाओं के कथा-संसार में निहित सामाजिक यथार्थ, स्त्री-अस्मिता, मनोवैज्ञानिक संवेदना तथा संरचनात्मक प्रयोगधर्मिता को समझना है। अध्ययन में पाया गया कि चित्रा मुद्गल की कहानियाँ श्रमिक वर्ग, सामाजिक विषमता और स्त्री-शोषण जैसे यथार्थवादी मुद्दों को स्पष्ट, सशक्त और प्रत्यक्ष शैली में प्रस्तुत करती हैं, जबकि गीतांजलि श्री की कहानियाँ अधिक प्रतीकात्मक, मनोविश्लेषणात्मक और प्रयोगशील होती हैं, जिनमें भाषा और संरचना के स्तर पर नवाचार दिखाई देता है। यह शोध तुलनात्मक पद्धति पर आधारित है, जिसमें चयनित कहानियों के कथ्य, शैली, पात्र-चित्रण और वैचारिक आधार का विश्लेषण किया गया है। निष्कर्षतः दोनों लेखिकाएँ स्त्री-विमर्श को केंद्र में रखती हैं, किंतु उनके दृष्टिकोण और अभिव्यक्ति के तरीके भिन्न हैं, जो हिंदी कथा-साहित्य को विविधता और गहराई प्रदान करते हैं। यह अध्ययन न केवल साहित्यिक मूल्यांकन करता है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों में भी इन रचनाओं की प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।

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Published

20-11-2025

How to Cite

Patil Dhanashree Diliprao, Dr. Rajendra Kashinath Baviskar. (2025). चित्रा मुद्गल एवं गीतांजलि श्री की कहानियों का तुलनात्मक अध्ययन. Kavya Setu, 1(11), 153–160. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/209

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