उभरते भारत में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के विचारों की प्रासंगिकता

Authors

  • तिलकराज

Keywords:

सामाजिक न्याय, संविधान और लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और मानवाधिकार

Abstract

डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर, जिन्हें बाबासाहेब अम्बेडकर के नाम से जाना जाता है, भारत के संविधान के शिल्पी, समाज सुधारक, अर्थशास्त्री, और दलित आंदोलन के प्रणेता थे। उनके विचार सामाजिक समानता, शिक्षा, लैंगिक समानता, आर्थिक न्याय, और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित थे। भारत, जो आज वैश्विक मंच पर एक उभरती हुई शक्ति के रूप में अपनी पहचान बना रहा है, सामाजिक-आर्थिक असमानता, जातिगत भेदभाव, लैंगिक असमानता, और राजनीतिक ध्रुवीकरण जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। यह शोध पत्र अम्बेडकर के विचारों की प्रासंगिकता को आधुनिक भारत के सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक परिदृश्य में विश्लेषित करता है, और यह दर्शाता है कि उनके सिद्धांत भारत को एक समावेशी और न्यायपूर्ण समाज बनाने में कैसे मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं।

References

यशवंत सोनटक्के, बाबा साहेब डॉ० अम्बेडकर के विचार, यूनिवर्सिटी पब्लिकेशन, नई दिल्ली, 2009।

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Published

11-05-2026

How to Cite

तिलकराज. (2026). उभरते भारत में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के विचारों की प्रासंगिकता. Kavya Setu, 2(5), 32–37. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/236

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