महात्मा बुद्ध के शैक्षिक चिंतन और मानसिक स्वास्थ्य शिक्षारू वर्तमान परिप्रेक्ष्य में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Authors

  • Mr. Rahul Kumar Roy, Dr. Pawan Kumar Sharma

Keywords:

महात्मा बुद्ध, शैक्षिक चिंतन, मानसिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा, ध्यान, माइंडफुलनेस, करुणा, आत्मसंयम, सम्यक दृष्टि, वर्तमान शिक्षा व्यवस्था।

Abstract

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा शिक्षा-जगत की एक अत्यंत महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुकी है। तीव्र प्रतिस्पर्धा, परीक्षा का दबाव, पारिवारिक अपेक्षाएँ, डिजिटल तकनीक का अत्यधिक उपयोग, सामाजिक अलगाव तथा जीवनशैली में तीव्र परिवर्तन के कारण विद्यार्थियों में तनाव, चिंता, अवसाद, आत्मविश्वास की कमी और भावनात्मक असंतुलन जैसी समस्याएँ निरंतर बढ़ रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य केवल मानसिक रोगों की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि व्यक्ति की ऐसी सकारात्मक अवस्था है जिसमें वह अपनी क्षमताओं को पहचानता है, दैनिक जीवन की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करता है तथा समाज के प्रति रचनात्मक योगदान देने में सक्षम होता है। इस संदर्भ में शिक्षा की भूमिका केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं रह सकती; उसे विद्यार्थियों के मानसिक, भावनात्मक तथा सामाजिक कल्याण को भी सुनिश्चित करना होगा।
महात्मा बुद्ध का शैक्षिक चिंतन मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा के लिए एक सुदृढ़ दार्शनिक एवं व्यावहारिक आधार प्रस्तुत करता है। बुद्ध ने मन को समस्त कर्मों का मूल माना तथा उसके शोधन, आत्मनियंत्रण और संतुलन पर विशेष बल दिया। उनकी शिक्षाओं में सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, करुणा, मैत्री, ध्यान, स्मृतिसंपन्नता तथा मध्यम मार्ग जैसी अवधारणाएँ मानसिक स्वास्थ्य के संवर्धन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती हैं। बुद्ध का मानना था कि मनुष्य के अधिकांश दुःख बाह्य परिस्थितियों से अधिक उसकी मानसिक प्रतिक्रियाओं और आसक्तियों से उत्पन्न होते हैं। इसलिए उन्होंने आत्मचिंतन, जागरूकता और विवेकपूर्ण जीवन को मानसिक शांति का आधार माना।
प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य महात्मा बुद्ध के शैक्षिक चिंतन में निहित मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सिद्धांतों का विश्लेषण करना तथा वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में उनकी प्रासंगिकता का अध्ययन करना है। यह अध्ययन गुणात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध पद्धति पर आधारित है तथा इसमें बौद्ध ग्रंथों, शिक्षा-दर्शन, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी साहित्य, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा समकालीन शोध अध्ययनों का विश्लेषण किया गया है।
अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि बुद्ध की शिक्षाएँ विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन, आत्मविश्वास, नैतिक विकास तथा सकारात्मक जीवन-दृष्टि के निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं। यदि विद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में ध्यान, माइंडफुलनेस, करुणा-आधारित गतिविधियों तथा जीवन-कौशल शिक्षा को व्यवस्थित रूप से सम्मिलित किया जाए, तो विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार संभव है। अतः महात्मा बुद्ध का शैक्षिक चिंतन वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा को अधिक प्रभावी, समावेशी एवं जीवनोपयोगी बनाने का एक सशक्त माध्यम सिद्ध हो सकता है।

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Mr. Rahul Kumar Roy, Dr. Pawan Kumar Sharma. (2025). महात्मा बुद्ध के शैक्षिक चिंतन और मानसिक स्वास्थ्य शिक्षारू वर्तमान परिप्रेक्ष्य में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. Kavya Setu, 1(12), 198–211. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/290

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