आषाढ़ का एक दिन’ में मल्लिका और उसकी माँ अम्बिका के संबंधों की वर्तमान समय मे प्रसंगिकता
Keywords:
मल्लिका, अंबिका, पीढ़ीगत द्वंद्व, स्वतंत्रता, पारिवारिक सामंजस्यAbstract
मोहन राकेश के नाटक ‘आषाढ़ का एक दिन’ में मल्लिका और उसकी माँ अंबिका के बीच का संबंध भावनात्मक निकटता, वैचारिक भिन्नता और जीवन-दृष्टि के द्वंद्व का सशक्त चित्रण करता है। अंबिका एक यथार्थवादी माँ हैं, जो जीवन की कठिन सच्चाइयों से अवगत हैं, जबकि मल्लिका प्रेम और भावना के स्तर पर जीने वाली युवती है। यह द्वंद्व आज की पीढ़ी में भी माँ-बेटी के रिश्तों में प्रकट होता है, जहाँ युवा बेटियाँ आत्मनिर्णय और स्वतंत्रता चाहती हैं, जबकि माताएँ अनुभव के आधार पर उन्हें चेतावनी देती हैं। अंबिका, मल्लिका को रोकती नहीं, बल्कि उसे सचेत करती हैं—यह भूमिका आज के माता-पिता के लिए भी आदर्श बन सकती है। दोनों के रिश्ते में संवाद, असहमति और अंततः मौन सहमति का जो स्वर है, वह आज के पारिवारिक जीवन में भी सामंजस्य और समझदारी की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
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