आषाढ़ का एक दिन’ में मल्लिका और उसकी माँ अम्बिका के संबंधों की वर्तमान समय मे प्रसंगिकता

Authors

  • प्रियंका शर्मा

Keywords:

मल्लिका, अंबिका, पीढ़ीगत द्वंद्व, स्वतंत्रता, पारिवारिक सामंजस्य

Abstract

मोहन राकेश के नाटक ‘आषाढ़ का एक दिन’ में मल्लिका और उसकी माँ अंबिका के बीच का संबंध भावनात्मक निकटता, वैचारिक भिन्नता और जीवन-दृष्टि के द्वंद्व का सशक्त चित्रण करता है। अंबिका एक यथार्थवादी माँ हैं, जो जीवन की कठिन सच्चाइयों से अवगत हैं, जबकि मल्लिका प्रेम और भावना के स्तर पर जीने वाली युवती है। यह द्वंद्व आज की पीढ़ी में भी माँ-बेटी के रिश्तों में प्रकट होता है, जहाँ युवा बेटियाँ आत्मनिर्णय और स्वतंत्रता चाहती हैं, जबकि माताएँ अनुभव के आधार पर उन्हें चेतावनी देती हैं। अंबिका, मल्लिका को रोकती नहीं, बल्कि उसे सचेत करती हैं—यह भूमिका आज के माता-पिता के लिए भी आदर्श बन सकती है। दोनों के रिश्ते में संवाद, असहमति और अंततः मौन सहमति का जो स्वर है, वह आज के पारिवारिक जीवन में भी सामंजस्य और समझदारी की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

References

राकेश, एम. (2015). वर्षा ऋतु में एक दिन: वह नाटक जिसने आधुनिक हिंदी रंगमंच की शुरुआत की। पेंगुइन यूके।

पटेल, वी. (2018)। सार का अनावरण: मोहन राकेश के नाटकों में विषयों की खोज। विद्यायन-एक अंतर्राष्ट्रीय बहुविषयक समकक्ष-समीक्षित ई-जर्नल-ISSN 2454-8596, 4(2)।

ग्रोवर, एम. (2024)। समय-यात्री के रूप में अभिनेता: मंच पर अभिनय की उम्र की राजनीति। भारत में वृद्धावस्था और आयुवाद की संस्कृतियों में (पृष्ठ 157-176)। रूटलेज इंडिया।

दास, पी. आर. (2021). अपना रंगमंच: भारतीय महिला नाटककारों का परिप्रेक्ष्य। पार्ट्रिज पब्लिशिंग।

सिंह, वी. (2024). बनारस: शहर के हृदय में एक यात्रा। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड।

एम. राकेश (2013)। आषाढ़ का एक दिन - मूल पाठ में मल्लिका और अंबिका के संवाद स्पष्ट करते हैं कि पारिवारिक उत्तरदायित्वों और स्त्री अस्मिता के बीच संघर्ष आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

मिश्रा, आर. (2021) मल्लिका का स्त्री चेतना और पारिवारिक दबावों का संघर्ष, हिंदी साहित्यिक पत्रिका (ISSN: 2349-8799)।

शर्मा, ए. (2020)। नाट्यशास्त्र और स्त्री विमर्श: आधुनिक परिप्रेक्ष्य से विश्लेषण, राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी

दुबई, नीला (2019). ‘आषाढ़ का एक दिन’ में नारी पात्रों की सामाजिक स्थिति

चतुर्वेदी, वंदना (2017). मल्लिका और अम्बिका का संवाद: समकालीन नारी दृष्टि से अध्ययन

तिवारी, के. (2018). भारतीय नाटक में मातृत्व और नारी आकांक्षाओं का द्वंद्व

कुमार, संजय (2020). साहित्य में मातृ-प्रतीक और स्त्री स्वातंत्र्य की अवधारणा

वर्मा, नंदिता (2022). आषाढ़ का एक दिन में पीढ़ियों के मूल्यों का टकराव

सिंह, रीना (2023). नारीवादी दृष्टिकोण से अम्बिका और मल्लिका के संबंधों की पुनर्व्याख्या

पांडे, आर. (2015). मातृत्व और आत्म-अनुशासन: एक पुनर्पाठ

जोशी, मीना (2019). नाटक में स्त्री की चुप्पी और प्रतिरोध: मल्लिका का विश्लेषण

सक्सेना, पी. (2016).आषाढ़ का एक दिन: पारिवारिक द्वंद्व की आधुनिक झलकियां

कुलकर्णी, एच. (2018). नाट्यपरंपरा में माताओं का मूक विद्रोह

पाठक, एस. (2021). आषाढ़ का एक दिन और स्त्री संघर्ष की शाश्वत कथा

Downloads

Published

11-08-2025

How to Cite

प्रियंका शर्मा. (2025). आषाढ़ का एक दिन’ में मल्लिका और उसकी माँ अम्बिका के संबंधों की वर्तमान समय मे प्रसंगिकता. Kavya Setu, 1(8), 1–14. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/61

Issue

Section

Original Research Articles

Similar Articles

1 2 > >> 

You may also start an advanced similarity search for this article.