पालन-पोषण का चतुर्थ चरण: कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं डिजिटल युग में जेनरेशन जेड के संदर्भ में अभिभावक-संतान संबंधों के परिवर्तित स्वरूप का अध्ययन।

Authors

  • चिरंजीव जैन

DOI:

https://doi.org/10.65578/kavyasetu.v2.i9.379

Keywords:

पालन-पोषण, जेनरेशन जेड, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल पालन-पोषण, अभिभावक–संतान संबंध, सामाजिक माध्यम, डिजिटल साक्षरता, पारिवारिक संबंध।

Abstract

समकालीन समाज में डिजिटल प्रौद्योगिकी, सामाजिक माध्यम तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने पारिवारिक जीवन की संरचना, संचार-पद्धति और अभिभावकीय व्यवहार को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। पारंपरिक पालन-पोषण जहाँ प्रत्यक्ष अनुशासन, अनुभवजन्य ज्ञान और पारिवारिक नियंत्रण पर आधारित था, वहीं डिजिटल युग में अभिभावकीय भूमिका सूचना-प्रदाता, डिजिटल मार्गदर्शक, जोखिम-नियामक तथा तकनीकी सहचर के रूप में पुनर्संरचित होती दिखाई देती है। प्रस्तुत अध्ययन इसी परिवर्तित परिदृश्य को “पालन-पोषण का चतुर्थ चरण” की अवधारणा के माध्यम से समझने का प्रयास करता है। अध्ययन का केंद्र जेनरेशन जेड के संदर्भ में अभिभावक–संतान संबंधों में आए परिवर्तनों का समाजशास्त्रीय विश्लेषण है।

अध्ययन के दो प्रमुख उद्देश्य निर्धारित किए गए हैं—(1) डिजिटल माध्यमों एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विस्तार के संदर्भ में जेनरेशन जेड तथा उनके अभिभावकों के मध्य संवाद, विश्वास, स्वायत्तता और नियंत्रण के बदलते स्वरूप का अध्ययन करना तथा (2) डिजिटल पालन-पोषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग और अभिभावक–संतान संबंधों के मध्य संबंध का परीक्षण करना। अध्ययन के लिए 200 उत्तरदाताओं का प्रस्तावित नमूना लिया गया है। संरचित प्रश्नावली के माध्यम से डिजिटल पालन-पोषण, पारिवारिक संवाद, डिजिटल निगरानी, स्वायत्तता, विश्वास तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से संबंधित सूचनाएँ एकत्रित की गईं। वर्णनात्मक सांख्यिकी, प्रतिशत, माध्य, मानक विचलन तथा सहसंबंधात्मक विश्लेषण का प्रयोग किया गया है। उदाहरणात्मक विश्लेषण में डिजिटल पालन-पोषण और अभिभावक–संतान संबंध के मध्य सकारात्मक संबंध तथा अत्यधिक डिजिटल नियंत्रण और संबंधात्मक तनाव के मध्य प्रतिकूल संबंध का संकेत प्राप्त होता है। अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि डिजिटल युग में प्रभावी पालन-पोषण का आधार केवल तकनीकी नियंत्रण नहीं, बल्कि डिजिटल साक्षरता, पारस्परिक विश्वास, संवाद, गोपनीयता का सम्मान और जिम्मेदार कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपयोग है।

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चिरंजीव जैन. (2026). पालन-पोषण का चतुर्थ चरण: कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं डिजिटल युग में जेनरेशन जेड के संदर्भ में अभिभावक-संतान संबंधों के परिवर्तित स्वरूप का अध्ययन।. Kavya Setu, 2(9), 129–138. https://doi.org/10.65578/kavyasetu.v2.i9.379

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