प्राचीन और आधुनिक कविता में सामाजिक परिवर्तन का चित्रण
Keywords:
भ्रष्टाचार, पर्यावरणीय संकट, महाभारत, स्वतंत्रता संग्राम, महाकाव्य, धार्मिक पाखंड, क्रांतिकारी दृष्टिकोणAbstract
प्राचीन और आधुनिक कविता में सामाजिक परिवर्तन का चित्रण मानव सभ्यता के विकास, संघर्ष, और चेतना का गहरा प्रतिबिंब है। प्राचीन कविता, विशेष रूप से वैदिक साहित्य, महाकाव्य, और भक्ति काव्य, समाज में नैतिकता, धार्मिकता, और समता के आदर्श स्थापित करने का माध्यम रही है। वैदिक मंत्रों में प्रकृति, धर्म, और समाज के संतुलन का संदेश है, जबकि "रामायण" और "महाभारत" में धर्म-अधर्म, नैतिकता, और सामाजिक मूल्यों के माध्यम से जीवन के आदर्श स्थापित किए गए। भक्ति युग में संत कवियों, जैसे कबीर और तुलसीदास, ने सामाजिक असमानताओं, जातिगत भेदभाव, और धार्मिक पाखंड के खिलाफ अपनी कविताओं के माध्यम से आवाज उठाई। दूसरी ओर, आधुनिक कविता ने स्वतंत्रता संग्राम, औद्योगिकीकरण, और सामाजिक परिवर्तन के दौर में मानवता की समस्याओं को गहराई से प्रस्तुत किया। सुभद्रा कुमारी चौहान, रामधारी सिंह दिनकर, और हरिवंश राय बच्चन जैसे कवियों ने स्वतंत्रता, समानता, और नारी सशक्तिकरण का आह्वान किया। समकालीन कवियों, जैसे नागार्जुन और मुक्तिबोध, ने गरीबी, भ्रष्टाचार, और पर्यावरणीय संकट को उजागर करते हुए समाज को जागरूक किया। प्राचीन कविता में प्रतीकात्मकता और भक्ति का स्वर प्रमुख था, जबकि आधुनिक कविता ने प्रत्यक्ष और क्रांतिकारी दृष्टिकोण अपनाया। दोनों युगों की कविताएँ समाज की आवश्यकताओं और परिस्थितियों के अनुरूप थीं, जो समाज सुधार और परिवर्तन का माध्यम बनीं। यह दर्शाता है कि कविता न केवल समाज का दर्पण है, बल्कि यह समाज को जागरूक और प्रेरित करने का एक सशक्त साधन भी है।
References
• ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, और अथर्ववेद - वैदिक साहित्य में समाज और धर्म का चित्रण।
• रामायण - वाल्मीकि द्वारा रचित महाकाव्य, जिसमें आदर्श समाज और नैतिकता का चित्रण।
• महाभारत - वेदव्यास द्वारा रचित, धर्म, अधर्म, और सामाजिक संरचना का महाकाव्य।
• तुलसीदास - रामचरितमानस (रामराज्य और भक्ति का चित्रण)।
• कबीरदास - साखी संग्रह (धार्मिक पाखंड और सामाजिक असमानताओं का विरोध)।
• सूरदास - सूरसागर (भक्ति और प्रेम के माध्यम से समाज सुधार)।
• सुभद्रा कुमारी चौहान - झाँसी की रानी (स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भूमिका)।
• रामधारी सिंह दिनकर - रश्मिरथी, परशुराम की प्रतीक्षा (क्रांति और समाज सुधार)।
• हरिवंश राय बच्चन - मधुशाला (पारंपरिक मूल्यों और समाज में बदलाव का दार्शनिक दृष्टिकोण)।
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