ध्यान आधारित अधिगम प्रक्रिया के संदर्भ में संवेगात्मक विकास: मानसिक संतुलन, स्मृति निर्माण और निर्णय-क्षमता का मनोवैज्ञानिक अध्ययन

Authors

  • मदनलाल टेम्भरें

Keywords:

ध्यान-आधारित अधिगम, संवेगात्मक विकास, मानसिक संतुलन, निर्णय-क्षमता।

Abstract

प्रस्तुत सैद्धान्तिक अध्ययन ध्यान-आधारित अधिगम प्रक्रिया के संदर्भ में संवेगात्मक विकास, मानसिक संतुलन, स्मृति-निर्माण तथा निर्णय-क्षमता के मनोवैज्ञानिक आयामों का समन्वित एवं गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। मानव अधिगम को सामान्यतः संज्ञानात्मक क्रिया तक सीमित कर दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप शिक्षा-प्रणाली में संवेगात्मक असंतुलन, मानसिक तनाव तथा विवेकहीन निर्णयों की समस्याएँ उभरकर सामने आती हैं। इस अध्ययन में यह प्रतिपादित किया गया है कि अधिगम एक बहुआयामी प्रक्रिया है, जिसमें चेतना, संवेग, स्मृति और निर्णय-क्षमता परस्पर अविभाज्य रूप से जुड़ी हुई हैं।

ध्यान-आधारित अधिगम को एक ऐसी चेतना-केंद्रित शैक्षिक दृष्टि के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो शिक्षार्थी को वर्तमान क्षण में सजग रहने, अपने संवेगों का तटस्थ निरीक्षण करने तथा मानसिक प्रक्रियाओं पर आत्म-नियंत्रण विकसित करने में सहायता करती है। अध्ययन दर्शाता है कि सजग ध्यान संवेगात्मक आत्म-नियमन को सुदृढ़ करता है, जिससे मानसिक संतुलन की स्थिति उत्पन्न होती है। यही संतुलन स्मृति-निर्माण को सतही रटन्त से ऊपर उठाकर अनुभवात्मक और दीर्घकालिक बनाता है।

इसके अतिरिक्त यह शोध स्पष्ट करता है कि ध्यान-आधारित अधिगम निर्णय-क्षमता को भी परिष्कृत करता है। सजग चेतना के माध्यम से व्यक्ति प्रतिक्रिया और प्रत्युत्तर के बीच विवेकपूर्ण अंतर करना सीखता है, जिससे उसके निर्णय अधिक संतुलित, नैतिक और दूरदर्शी बनते हैं। समग्रतः यह अध्ययन निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि ध्यान-आधारित अधिगम शिक्षा को केवल बौद्धिक अभ्यास न रखकर संपूर्ण व्यक्तित्व-विकास की प्रक्रिया में रूपांतरित कर सकता है तथा समकालीन शिक्षा-प्रणाली में इसके समावेशन की गहन आवश्यकता है।

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Published

20-01-2026

How to Cite

मदनलाल टेम्भरें. (2026). ध्यान आधारित अधिगम प्रक्रिया के संदर्भ में संवेगात्मक विकास: मानसिक संतुलन, स्मृति निर्माण और निर्णय-क्षमता का मनोवैज्ञानिक अध्ययन. Kavya Setu, 2(1), 102–113. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/160

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