अल्मा कबूतरी उपन्यास में कबूतरा जनजाति का लोक-व्यवहार एवं संस्कृति
Keywords:
लोक-व्यवहार, संस्कृति, स्वच्छन्दतापूर्वक जीवन, जनजातीय अस्मिता।Abstract
खानाबदोश के रूप में जीवन व्यतीत करती जनजातियां देश के सभी अंचलों में निवास करती हैं। नट, कंजर, कबूतरा, हाबूड़े आदि जनजातियों के कुछ समूह गांवों के समीप सीमाओं में अपना बसेरा स्थापित करते रहे हैं। मुख्य समाज से अलग निवास की प्रकृति ने उनमें स्वच्छन्दतापूर्वक जीवन जीने की अभिलाषा निर्मित होती रही। भारतीय समाज व्यवस्था में जनजातियों का अलग विशेष स्थान रहा है। जनजातियों की सामाजिक व्यवस्था उनके अपने कबीले एवं जातियों में निर्मित सामाजिक-सांस्कृतिक मान्यताओं के आधार पर परिचालित होती है। प्रत्येक जनजाति का अपना एक सामाजिक संगठन है और उनकी संस्कृति में विविधता दिखाई देती है। प्रस्तुत आलेख में अल्मा कबूतरी उपन्यास में कबूतरा जनजाति के लोक-व्यवहार एवं संस्कृति का अध्ययन किया गया है।
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