अल्मा कबूतरी उपन्यास में कबूतरा जनजाति का लोक-व्यवहार एवं संस्कृति

Authors

  • डॉ. नांग सुलिना चाउतांग

Keywords:

लोक-व्यवहार, संस्कृति, स्वच्छन्दतापूर्वक जीवन, जनजातीय अस्मिता।

Abstract

खानाबदोश के रूप में जीवन व्यतीत करती जनजातियां देश के सभी अंचलों में निवास करती हैं। नट, कंजर, कबूतरा, हाबूड़े आदि जनजातियों के कुछ समूह गांवों के समीप सीमाओं में अपना बसेरा स्थापित करते रहे हैं। मुख्य समाज से अलग निवास की प्रकृति ने उनमें स्वच्छन्दतापूर्वक जीवन जीने की अभिलाषा निर्मित होती रही। भारतीय समाज व्यवस्था में जनजातियों का अलग विशेष स्थान रहा है। जनजातियों की सामाजिक व्यवस्था उनके अपने कबीले एवं जातियों में निर्मित सामाजिक-सांस्कृतिक मान्यताओं के आधार पर परिचालित होती है। प्रत्येक जनजाति का अपना एक सामाजिक संगठन है और उनकी संस्कृति में विविधता दिखाई देती है। प्रस्तुत आलेख में अल्मा कबूतरी उपन्यास में कबूतरा जनजाति के लोक-व्यवहार एवं संस्कृति का अध्ययन किया गया है।

References

मैत्रेयी पुष्पा, अल्मा कबूतरी, पृ. 132

महेश कटारे, चीखते सपने का सफर (समीक्षा), साक्षात्कार, जुलाई, 2000, अंक-247, पृ. 112

मैत्रेयी पुष्पा, अल्मा कबूतरी, पृ. 37

वही, पृ. 99, 100

वही, पृ. 81

वही, पृ. 310

ललित कार्तिकेय, प्रकृतवाद के लौह-शिकंजे में कैद अल्मा (आलेख), आलोचना, जुलाई-सितम्बर, 2001, सहस्राब्दी अंक-06, पृ. 115

मैत्रेयी पुष्पा, अल्मा कबूतरी, पृ. 51

वही, पृ. 66

वही, पृ. 14

वही, पृ. 56, 57

वही, पृ. 33

वही, पृ. 14

वही, पृ. 37

वही, पृ. 14

वही, पृ. 129

वही, पृ. 34

वही, पृ. 42

वही, पृ. 26

Downloads

Published

04-02-2026

How to Cite

डॉ. नांग सुलिना चाउतांग. (2026). अल्मा कबूतरी उपन्यास में कबूतरा जनजाति का लोक-व्यवहार एवं संस्कृति. Kavya Setu, 2(2), 48–56. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/165

Issue

Section

Original Research Articles

Similar Articles

<< < 1 2 3 4 

You may also start an advanced similarity search for this article.