लोके वेदे च (कुमाऊनी शकुनाखर गीतों के सन्दर्भ में)

Authors

  • डाॅ. मीनू जोशी

DOI:

https://doi.org/10.65578/kavyasetu.v2.i1.217

Keywords:

लोक, वेद, लोकसाहित्य, लोकसंस्कृति, वैदिक संस्कति, लोकगीत, षोडश संस्कार, वैदिक मंत्र।

Abstract

प्रस्तुत लेख में लोक और वेद के गहन संबंध को कुमाऊँनी शकुनाखर गीतों के संदर्भ में स्पष्ट किया गया है। भारतीय संस्कृति में वेद ज्ञान के मूल स्त्रोत हैं और हमारे धार्मिक अनुष्ठान संस्कार तथा सामाजिक परम्परांए इन्हीं पर आधरित हैं। हिन्दू धर्म के षोडश संस्कारों में वैदिक मंत्रों का विशेष महत्व है।
कुमाऊं क्षेत्र में इन संस्कारों के अवसर पर गाए जाने वाले लोकगीत वैदिक मंत्रों के समानान्तर चलते हैं। जहां एक ओर आचार्य वैदिक मंत्रोचार करते हैं, वहीं दूसरी ओर महिलाएं उसी अनुष्ठान से संबंधित लोकगीत गाती हैं। इस प्रकार लोक और वेद का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
शकुनाखर, गणेश-पूजन, नामकरण, विवाह जैसे संस्कार गीत वैदिक भावभूमि से प्रेरित हैं। ये गीत लोकभाषा लोेकभावना और सांस्कृतिक मूल्यों के संवाहक हैं। इन्हें वैदिक मंत्रों का लोकानुकूल रूप भी कहा जा सकता है।
अतः लोकगीत भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। उन्होने वैदिक परम्पराओं को जनसामान्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनके संरक्षण और संवर्धन से हमारी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सकती है।

References

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Published

20-01-2026

How to Cite

डाॅ. मीनू जोशी. (2026). लोके वेदे च (कुमाऊनी शकुनाखर गीतों के सन्दर्भ में). Kavya Setu, 2(1), 143–149. https://doi.org/10.65578/kavyasetu.v2.i1.217

Issue

Section

Original Research Articles