अंतरिक्ष और अस्तित्व: हिंदी साहित्य में कल्पना और यथार्थ का संगम

Authors

  • ऊषा रानी

Keywords:

हिंदी साहित्य, कल्पना, यथार्थ, अंतरिक्ष, विज्ञान, अस्तित्व, फंतासी, विज्ञान-कथा, अस्तित्ववाद, आधुनिकता

Abstract

यह शोधपत्र हिंदी साहित्य में कल्पना और यथार्थ के संगम का विश्लेषण करता है, जिसमें 2000 से 2024 तक के साहित्यिक विकास को केंद्र में रखा गया है। इस अध्ययन में यह देखा गया है कि कैसे हिंदी कथाओं, उपन्यासों और कविताओं ने अंतरिक्ष, विज्ञान, और अस्तित्ववादी प्रश्नों की कल्पनाशीलता के साथ यथार्थ के गहरे सामाजिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक संदर्भों का समावेश किया है। शोध का उद्देश्य हिंदी साहित्य के कल्पनाशील विस्तार और उसके यथार्थवादी सरोकारों की पड़ताल करना है, जिससे साहित्य की बदलती प्रवृत्तियों और संभावनाओं को समझा जा सके।

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Published

11-02-2026

How to Cite

ऊषा रानी. (2026). अंतरिक्ष और अस्तित्व: हिंदी साहित्य में कल्पना और यथार्थ का संगम. Kavya Setu, 2(2), 127–135. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/247

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