प्रेमचंद की कहानियों में सामाजिक यथार्थ

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  • प्रेमचंद की कहानियों में सामाजिक यथार्थ

Keywords:

प्रेमचंद, सामाजिक यथार्थ, जातिवाद, गरीबी, लैंगिक भेदभाव, समाज सुधार

Abstract

प्रेमचंद की कहानियाँ भारतीय समाज के सामाजिक यथार्थ को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से समाज की गहरी असमानताओं, गरीबी, जातिवाद, और लैंगिक भेदभाव को उजागर किया। उनकी कहानियाँ, जैसे गोदान, निर्मला, और कफन, न केवल समाज के निचले वर्गों के संघर्ष को दिखाती हैं, बल्कि उन्होंने इस संघर्ष के पीछे की जटिल सामाजिक और सांस्कृतिक स्थितियों को भी सामने लाया। प्रेमचंद ने अपने पात्रों के माध्यम से समाज में व्याप्त अन्याय और असमानताओं को चित्रित किया और समाज सुधार की आवश्यकता को प्रकट किया। उनका लेखन न केवल उस समय के भारतीय समाज का दर्पण था, बल्कि यह आज भी प्रासंगिक है, क्योंकि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे आज भी समाज में मौजूद हैं। प्रेमचंद की कहानियाँ समाज में सामाजिक चेतना और सुधार के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य करती हैं।

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Published

28-05-2025

How to Cite

प्रेमचंद की कहानियों में सामाजिक यथार्थ. (2025). प्रेमचंद की कहानियों में सामाजिक यथार्थ. Kavya Setu, 1(5), 1–10. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/30

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