नाथ संप्रदाय में ब्रह्म की अवधारणा एक अनुशीलन

Authors

  • उषा खत्री
  • डॉ॰ जगदीश भारद्वाज

Keywords:

ब्रह्मा, चेतना, अद्वैतवाद, तन्त्र

Abstract

नाथ संप्रदाय में ब्रह्म का स्वरूप एक महत्त्वपूर्ण विषय हैं। नाथ संप्रदाय में ब्रह्म को सर्वोच्च चेतना माना जाता है, जो सृष्टि के रचियता और संचालक हमने नाथ संप्रदाय में ब्रह्म के स्वरूप के विभिन्न पहलुओं को समझाया है, जैसे कि यौगिक स्वरूप याक्तिक स्वरूप और अद्भुत स्वरूप। इस संप्रदाय में ब्रह्म का स्वरूप एक महत्त्वपूर्ण विषय है जो नाथ संप्रदाय के दर्शन और साधना को समझने में मदद करता है।
नाथ संप्रदाय के मुन्यों में ब्रह्म के दर्शन में अद्वैतवाद और तंत्रवाद के तत्त्व शामिल है। नाथ संप्रदाय के अनुयायी ब्रह्म को सर्वोच्च सत्ता मानते हैं और उसे अपने जीवन का लक्ष्य मानते हैं। नाथ संप्रदाय में ब्रह्म का स्वरूप अद्वैतवधि और तंत्रवादी दोनों है। गोरखशतक और गोरखबोध, जैसे ग्रन्थों में ब्रहा के स्वरूप का विस्तार से वर्णन किया गया है।

References

डॉ॰ रामसिंह, नाथ संप्रदाय का इतिहास, पृ॰ 56

डॉ॰ शिवप्रसाद, नाथ संप्रदाय के दर्शन, पृ० 24

गुरु गोरखनाथ दर्शन 2015, पृ० 34

डॉ० शिवप्रसाद, नाथ संप्रदाय के गोरखशतक, 2005, पृ॰ 12

डॉ० रामसिंह, नाथ संप्रदाय का इतिहास 2010, पृ० 23

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How to Cite

उषा खत्री, & डॉ॰ जगदीश भारद्वाज. (2026). नाथ संप्रदाय में ब्रह्म की अवधारणा एक अनुशीलन. Kavya Setu, 2(3), 267–272. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/357

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