19वीं सदी में पानीपत की कृषि अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं हस्तशिल्प में परिवर्तन

Authors

  • Radhika
  • Deepak Singh

Keywords:

पानीपत, उन्नीसवीं सदी, कृषि अर्थव्यवस्था, भूमि-राजस्व, पश्चिमी यमुना नहर, व्यापार, हस्तशिल्प, औपनिवेशिक आर्थिक परिवर्तन।

Abstract

उन्नीसवीं सदी में पानीपत की अर्थव्यवस्था कृषि, स्थानीय व्यापार और हस्तशिल्प के पारस्परिक संबंधों पर आधारित थी। यमुना के निकटवर्ती खादर क्षेत्र, अपेक्षाकृत ऊँचे बाँगर भूभाग तथा नहरों से प्रभावित क्षेत्रों की भौगोलिक विषमताओं ने खेती की प्रकृति और उत्पादन की संभावनाओं को अलग-अलग रूप दिया। इसी अवधि में ब्रिटिश भू-राजस्व प्रशासन, सिंचाई व्यवस्था, सड़क और रेल परिवहन तथा बाजारों के विस्तार ने आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित किया। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य इन परिवर्तनों को केवल प्रगति अथवा पतन की एकरेखीय प्रक्रिया मानने के बजाय उनके क्षेत्रीय अंतर, अवसरों और सीमाओं का विश्लेषण करना है। अध्ययन में विशेष रूप से डेन्जिल इबेटसन की 1872-1880 की पानीपत तहसील संबंधी बंदोबस्त रिपोर्ट तथा 1883-84 और 1892 के करनाल जिला गजेटियरों को आधार बनाया गया है। ये स्रोत उन्नीसवीं सदी के पानीपत के कृषि उत्पादन, भूमि-राजस्व, व्यापारिक मार्गों और शिल्प व्यवसायों पर प्रत्यक्ष जानकारी देते हैं। उस समय पानीपत वर्तमान स्वतंत्र जिले के रूप में नहीं, बल्कि बदलती प्रशासनिक सीमाओं के अंतर्गत एक नगर एवं तहसील के रूप में विद्यमान था। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि सिंचाई और परिवहन की उपलब्धता ने कुछ कृषि क्षेत्रों तथा व्यापारिक गतिविधियों को नए अवसर दिए, किंतु वर्षा की अनिश्चितता, राजस्व माँग, ऋण, बाजार-मूल्यों के उतार-चढ़ाव और व्यापारिक मार्गों के स्थानांतरण ने आर्थिक जोखिम भी उत्पन्न किए। हस्तशिल्प के क्षेत्र में ग्रामीण बुनाई के साथ-साथ पानीपत के ताँबे-पीतल के बर्तन, चमड़े के पात्र, सजावटी काँच और धातु-आभूषण उल्लेखनीय थे। कुछ विशिष्ट शिल्पों में गिरावट के साक्ष्य मिलते हैं, परंतु समस्त हस्तशिल्प के एकसमान विनाश का निष्कर्ष उपलब्ध अभिलेखों से नहीं निकलता। इस प्रकार पानीपत की उन्नीसवीं सदी की आर्थिक संरचना को कृषि, बाजार और शिल्प के बीच निरंतर बदलते संबंधों के रूप में समझना अधिक उचित है।

References

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How to Cite

Radhika, & Deepak Singh. (2026). 19वीं सदी में पानीपत की कृषि अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं हस्तशिल्प में परिवर्तन. Kavya Setu, 2(9), 70–81. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/369

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