हरियाणा के हिन्दी साहित्य में भिवानी जनपद के साहित्यकारों का तथ्यों की दृष्टि से अवदान।
Keywords:
साहित्य, समाज और संस्कृति, क्षेत्रीय साहित्य, भिवानी जनपद, सामाजिक चेतना, राष्ट्रीय चेतना, प्रकृति प्रेम, नारी सम्मान, सामाजिक सुधार, साहित्यिक विधाए, लोकजीवनAbstract
साहित्य किसी भी समाज, प्रदेश या देश के जनमानस की भावनाओं का जीवंत दर्पण होता है। यह समयानुसार बदलते सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक और धार्मिक परिवेश की सहज प्रतिक्रिया के रूप में निर्मित होता है। भिवानी जनपद पूरे भारत में अपनी वीरता, साहस, प्रकृति प्रेम, सामाजिक सुधार, तपस्या, दानशीलता, और नारी जाति के प्रति आदरभाव के लिए जाना जाता है। यहाँ की साहित्यिक धारा भावों और विचारों की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण रही है। इस क्षेत्र में लेखकों ने महाकाव्य, खण्डकाव्य, गीत, गजल, निबंध, नाटक, लघुकथा, आलोचना और पत्रकारिता जैसे विभिन्न साहित्यिक रूपों को अपनाकर जीवन के गूढ़ पक्षों को उजागर किया है। भिवानी जनपद का साहित्य सामाजिक, धार्मिक, प्राकृतिक, आर्थिक, राजनीतिक और आध्यात्मिक भावभूमि पर आधारित है, जो भावों की विविध परतों को हमारे सामने लाता है। इन रचनाओं में समाज की मान्यताओं, परंपराओं, विश्वासों और लोकाचारों की स्पष्ट झलक मिलती है, जिन्हें साहित्यकार दर्पण की भाँति पाठकों के सामने प्रस्तुत करते हैं। यहाँ के लेखक मानव मूल्यों की गहरी समझ रखते हैं और उनके लेखन में देशभक्ति की भावनाएँ प्रमुखता से उभरकर आती हैं। इस अध्याय में हम भिवानी क्षेत्र की साहित्यिक कृतियों का विश्लेषण करेंगे, जिसमें भावों की विविधता और उनकी अभिव्यक्ति की कलात्मकता को ध्यान में रखा जाएगा।
References
एम. एल. गुप्ता, समाजशास्त्र, पृ० 279
डॉ० विद्या भूषण, समाज शास्त्र के सिद्धांत, पृ० 110
श्री कैलाशनाथ जेतली, समाज दर्शन, पृ0 24
डॉ० मनोज कुमार शर्मा, डॉ० उदयभानु हंस के साहित्य का सामाजिक एवं साँस्कृतिक अनुशीलन
डॉ० उदयभानु हंस रचनावली भाग-1, हिन्दी रूबाइयाँ पृ० 122
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