21वीं सदी में दलित समाज में धर्मान्तरण की प्रवृत्ति : कारण और परिणामों का समालोचनात्मक अध्ययन

Authors

  • कल्पना जांभुलकर, डॉ. ममता चंसोरिया

Keywords:

ऑनलाइन शिक्षा, शैक्षणिक उपलब्धि, माध्यमिक छात्र, प्रत्यक्ष प्रभाव, हाइब्रिड मॉडल

Abstract

वर्तमान अध्ययन का उद्देश्य ऑनलाइन शिक्षा की वास्तविक परिस्थितियों और उसके प्रत्यक्ष परिणामों का मूल्यांकन करना है। कोविड-19 महामारी के बाद जब शिक्षण का स्वरूप तेजी से डिजिटल माध्यमों पर निर्भर हुआ, तब माध्यमिक विद्यालय के छात्रों के लिए यह एक महत्वपूर्ण परिवर्तन साबित हुआ। इस शोध में सर्वेक्षण, प्रश्नावली और साक्षात्कार के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, जिससे यह निष्कर्ष सामने आया कि ऑनलाइन शिक्षा ने छात्रों को नई तकनीकी दक्षताओं, लचीलेपन और स्व-शिक्षण की प्रवृत्ति विकसित करने का अवसर दिया। छात्रों को विषय-वस्तु की पुनरावृत्ति, विविध डिजिटल संसाधनों तक पहुँच और समय का सदुपयोग करने का लाभ प्राप्त हुआ। हालाँकि, इसके प्रत्यक्ष प्रभावों में कई सीमाएँ भी स्पष्ट हुईं—जैसे इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या, उपकरणों की अनुपलब्धता, स्क्रीन पर अधिक समय बिताने से स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ और सहपाठी सहयोग की कमी। कई छात्रों ने एकाकीपन और ध्यान की कमी जैसी समस्याएँ भी अनुभव कीं, जिसने उनकी शैक्षणिक उपलब्धि को प्रभावित किया। विश्लेषण यह दर्शाता है कि जहाँ एक ओर ऑनलाइन शिक्षा ने ज्ञानार्जन और तकनीकी क्षमता को सुदृढ़ किया, वहीं दूसरी ओर यह सामाजिक-भावनात्मक विकास और अनुशासन निर्माण में कम प्रभावी रही। इस अध्ययन का निष्कर्ष है कि माध्यमिक छात्रों की शैक्षणिक उपलब्धि पर ऑनलाइन शिक्षा के प्रत्यक्ष प्रभाव मिश्रित स्वरूप में सामने आते हैं और भविष्य में हाइब्रिड मॉडल अधिक उपयुक्त विकल्प हो सकता है।

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Published

12-01-2026

How to Cite

कल्पना जांभुलकर, डॉ. ममता चंसोरिया. (2026). 21वीं सदी में दलित समाज में धर्मान्तरण की प्रवृत्ति : कारण और परिणामों का समालोचनात्मक अध्ययन. Kavya Setu, 2(1), 18–30. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/131

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