E20 पेट्रोल और ईरान–इज़रायल संघर्ष, भारत की ऊर्जा सुरक्षा एवं ईंधन मूल्य स्थिरता का विश्लेषण

Authors

  • डॉ. अशोक मीना

DOI:

https://doi.org/10.65578/kavyasetu.v2.i9.375

Keywords:

E20, इथेनॉल मिश्रण, ऊर्जा सुरक्षा, होर्मुज जलडमरूमध्य, कच्चा तेल, ईंधन मूल्य स्थिरता, भू-राजनीति, जैव ईंधन

Abstract

वर्ष 2026 में पश्चिम एशिया में उत्पन्न सैन्य संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के अवरोध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को उस स्तर की अस्थिरता में धकेल दिया, जिसे अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने तेल बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी आपूर्ति बाधा बताया। ठीक उसी कालखंड में भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य निर्धारित समय से पाँच वर्ष पूर्व प्राप्त किया और 1 अप्रैल 2026 से यह मिश्रण देशव्यापी रूप से लागू हुआ। यह शोध पत्र इन दो समानांतर घटनाक्रमों — एक बाह्य भू-राजनीतिक आघात और एक आंतरिक ऊर्जा-प्रतिस्थापन नीति — के पारस्परिक संबंध का विश्लेषण करता है।

अध्ययन का केंद्रीय प्रश्न यह है कि क्या E20 कार्यक्रम ने संकटकाल में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन मूल्य स्थिरता को मापने योग्य रूप से मजबूत किया, अथवा इसका योगदान प्रतीकात्मक अधिक और संरचनात्मक कम रहा। द्वितीयक आँकड़ों, सरकारी प्रकाशनों तथा बाजार रिपोर्टों के आधार पर पत्र यह निष्कर्ष निकालता है कि E20 ने पेट्रोल खंड में एक सीमित किन्तु वास्तविक मूल्य-कुशन (price cushion) उत्पन्न किया, परंतु यह कुशन कुल पेट्रोलियम टोकरी के लगभग तीन प्रतिशत तक ही सीमित है और इसलिए यह डीज़ल, एलपीजी तथा एलएनजी की भेद्यता की भरपाई नहीं कर सकता। पत्र आठ खंडों, छह तालिकाओं ,दो दंड आरेख चित्रों  और पंद्रह संदर्भों के माध्यम से नीतिगत निहितार्थ प्रस्तुत करता है।

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डॉ. अशोक मीना. (2026). E20 पेट्रोल और ईरान–इज़रायल संघर्ष, भारत की ऊर्जा सुरक्षा एवं ईंधन मूल्य स्थिरता का विश्लेषण. Kavya Setu, 2(9), 97–114. https://doi.org/10.65578/kavyasetu.v2.i9.375

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Original Research Articles