परशुराम शुक्ल के कथा साहित्य में पर्यावरण एक अनुशीलन

Authors

  • राजेश कुमारी
  • डाॅ॰ राजेन्द्र सिंह

Keywords:

पर्यावरण, भौतिकतावादी, अप्रत्यक्ष, संरक्षण, आविष्कार, वैज्ञानिक आविष्कारों

Abstract

पर्यावरण का सीधा संबध प्रकृति से है। आज पर्यावरण एक जरूरी सवाल ही नहीं बल्कि ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है लेकिन आज लोगों में इसे लेकर कोई जागरूकता नहीं है। परिणामस्वरूप पर्यावरण सुरक्षा महज एक सरकारी एजेण्डा ही बनकर रह गया है। ऑक्सफोर्ड शब्दकोष ने पर्यावरण के स्वरूप को परिभाषित करते हुए कहा है कि वह प्राकृतिक संसार जो भूमि- वायु और जमीन के बीच अंतरसंबंधों के साथ-साथ अन्य जीवों, पौधो सूक्ष्म जीवों और संपदाओं के बीच अंर्तसंबंधों को सम्मिलित किए रहता है।
आज के नैनिहाल कल के सुनहरे राष्ट्र की धरोहर है। हिन्दी बाल कविता के माध्यम से बच्चों का उनके व्यक्तित्व के विकास के लिए आधार तैयार होता है। मनुष्य का प्रकृति से, अनोदिकाल से संबंध रहा है। मनुष्य ने अपना सारा उत्कर्ष प्रकृति के गोद में ही पाया है। प्राकृति का हरा-भरा मनमोहक सुखदायी रूप प्रत्येक प्राणी के मन को मोहित कर लेता है। प्रकृति हमें भीषण गर्मी, वर्षा एवं शीत ऋतु में अपने उपकारों से उत्कर्ष करती है। वृक्ष कभी कुछ नहीं लेते सदैव देते ही रहते हैं। धरती माँ के अनगिनत उपकार है हमारे ऊपर, बदले में कुछ नहीं लेती। धरी माँ प्रकृति पर्यावरण को हरा-भरा रखकर अनेक रत्न उगलती है इसलिये पृथ्वी को रत्नगर्भा कहा गया है। वन खेतों से सोना उगलती है वह किसी से ऊँच-नीच का भेदभाव किये बिना समाज भाव से सभी वन कल्याण चाहती है। हमारा धरती माँ के प्रति कर्तय भी है कि उसे इस हरा-भरा अभिसिंचित रखें एवं धरती माँ को विखण्डित और प्रदूषित होने से बचाएँ। प्रकृति में पशु-पक्षियों वन जीवों का भी पर्यावरण चेतना एवं संरक्षण में अमूल्य योगदान रहा है।

References

परशुराम शुक्ल, सुनहरी परी और राजकुमार, विवेक प्रकाशन, दिल्ली, 1989.

परशुराम शुक्ल, लाल किरण, विज्ञान लोक, दिल्ली, 2013.

परशुराम शुक्ल, लाल किरण, विज्ञान लोक, दिल्ली, 2013.

परशुराम शुक्ल, चालाक चीकू और दुष्ट भेडिया, लोक वाणी संस्थान, दिल्ली, सन् 2011.

परशुराम शुक्ल, क्रोध का कीडा, श्रेया प्रकाशन, इलाहाबाद, 2009.

परशुराम शुक्ल, भारत के महत्वपूर्ण वृक्ष, सोनू पब्लिकेशन, जयपुर 2009.

Downloads

Published

08-04-2026

How to Cite

राजेश कुमारी, & डाॅ॰ राजेन्द्र सिंह. (2026). परशुराम शुक्ल के कथा साहित्य में पर्यावरण एक अनुशीलन. Kavya Setu, 2(4), 51–55. Retrieved from https://kavyasetu.com/index.php/j/article/view/206

Issue

Section

Original Research Articles

Similar Articles

<< < 1 2 

You may also start an advanced similarity search for this article.